भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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आदि पर्व ] पृथ्वीराजरासो । ६६ ॥ बीसलदेवजी का अंत समय पट्टन विजय करने को छत्र धारणा करना ॥ दूहा ॥ वर पहन अहन अमित । समित वेद फुनि राज ॥ समय अंत बीसल सिरह । धस्यौ छत्र सम साज ॥ ॥ कूं० ॥ ३४० ॥ रू० ॥ १६६ ॥ पद्धरी ॥ सिर धारि छत्र वीसल नरिंद । आसनह सिंघ वर वरन इंद ॥ भूदेव मंडि वेदी विसाल । रस पंच मेधि मेलेँ ति काल ॥ कूं० ॥ ३४१ ॥ वर बढी ज्वाल खंडन विभाग । जमि रहे जमत्त पुट पञ्जति लाग ॥ मष समुष दिष्व परस्पर वैन । तिन पुटह बीच तन धूम औन ॥ कूं० ॥ ३४२ ॥ जानीत वेद मुख रहै मैंान । सुभ समय असुभ उच्चार कौंन ॥ संपूर् वेद किन्ने भिषेक । दुज दय वंदि आसिष अषेष ॥ कूं० ॥ ३४३ ॥ बिधि औन राज दिय सु जप माल । जै जया सबद बीसल भुच्चाल ॥ ॥ कूं० ॥ ३४४ ॥ रू० ॥ १७० ॥ है कि जिस से निर्णय करने में यह झगड़ा पड़ जाता है कि अमुक प्रशस्ती पृथ्वीराजजी की है अथवा बीसलदेवजी की । हमारे पास इन प्रशस्तियों संबन्धी सन्न संज प्रस्तुत नहीं है और न इतना अवकाश है नहीं तो हम ही परिश्रम करके कुछ विशेष सारांश प्रकाश करते । इस के अतिरिक्त जो सं० १२३० जैसी प्रशस्तियों को वीसलदेवजी की मानें तो फिर पृ थ्वीराजजी को तेरहवें शतक में मानना पड़ेगा कि उस दशा में भी पृथ्वोराज जी चितोड़ की और आबू की प्रशस्तियों के अनुसार रावल समरसीजो के समकालीन होंगे और मुसलमानी तवारीखों के सन झूठे ठहर कर संशत प्रसूत हुई तर्क के अनुसार मुसलमानी तारीख जालीं सिद्ध होंगी ॥ ' Om. In the year 1230, on the first day of the bright half of the month Vaishakh. (a monument) of the Fortunate-Visal-Deva,-son-of-the-Fortunate-Amilla-Deva- King-of-Sacumbhari, Popular Ed. of the Asiatic Researches, page 315. पाठान्तर :-पाठ । बर । वर । प्रतिपादा । प्रतीपदौ । छत्तीस । सारै । दीयौ । उच्चारे । नैर ॥ १६६ पाठान्तर :-पुनि । समैं । सरह । धैयौ । जास ॥ १७० पाठान्तर :-मंडि । छत्रधारि । घंवरन । इंद्र । मधि । मेले । मले । मेलिय । वढिय । वटी । दिपिं । बेन । पुट । हबी । चतन । औन । रहे । मोंन । शुभ । अशुभ । कोंन । कीनो । बंध । बंधि । एन । शद्द । भूवाल ॥