भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 92, कुल 470 में से

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आदि पर्व ] पृथ्वीराजरासौ । ८१ ॥ बीसलदेवजी को अपने को पूर्ण पुरुषत्व प्राप्त होना देखकर वहां बीसलपुर बसाय महादेव का देवल बनने का हुकम देना ॥ कवित्त ॥ पहुर रात पछिली । राज आए डेरा मधि ॥ वढिय काम कामना । भई पुरिसातन की सिधि ॥ प्रातकाल करि न्हान । धेन विप्रन कौं दीनी ॥ पंचा अमृत धूप । दीप सिव सेवा कीनी ॥ तिहि बार हुकम * देवल करन । पुर † बसाइ बीसल † धरूच ॥

  • यह हिन्दी शब्द हुकॅम अथवा हुक्कम संस्कृत शब्द सूक्तम् से बना है ॥ † चाहुवान वंश की ख्यातिओं में बीसलदेवजी का उपनाम पुष्पक होना लिखा है और जो आज कल गुजरात में विशन नगर अथवा विसन नगर करके प्रख्यात है वही यह बीसल- पुर बीसलदेवजी का बसाया हुआ है और उसी दिन से बडनगरे नागरों में के कुछ नागरों की विसननगरा नामक संज्ञा पड़ी है । हमारे इस अनुमान की कविराज श्रीदलपतरामजी सी० आई० ई० अपने ज्ञातिनिबन्ध नामक ग्रंथ में नीचे लिखे प्रमाण पुष्टि करते हैं :- जे रीते औदिच्यप्रकाश तथा श्रीमाली महात्म्य स्कंध पुराण मां छे, तेमज नागर ब्राह्मणोंनी उत्पत्ति नो ग्रंथ "नगरखंड" नामे घणो मोटो छे, ते पण स्कन्ध पुराण मां छे । ते नागरी नी उत्पत्ति गुजरात मां बडनगर गाम मां थई । पण ते क्यारे थई, तेनो संवत कांई ओ पुस्तक मां लख्यो नथी तेनुं कारण ओज जाणवुं के सवत लखवा थी तथा बनावनार नुं नाम लखवा थी ग्रंथ जूनो केहेवाय नही । पण नागर ब्राह्मणो नो प्रवराध्याय नामे ग्रंथ में जोयो छे तेमां लखे छे के, श्लोक ॥ श्रीमदानंदपुर महास्थानीय पंचदशशतगोत्राणां । संवत् २८३ पूर्वतिष्ठमान गोत्राणां समानप्रवरस्य निबंधः ॥ अर्थ ॥ शोभायमान ओवा आनंदपुर, मोटास्थानवाला पंदरसें गोत्रोमांथी संवत् २८३ थी पहेलां रहेलां गोत्रोना ओकज सरखा नामोवानो निबंध लखूं हूं ॥ ओ ऊपर थी आशरे मालम पड़े छे के ओ बखत मां नांगरो नी नात बंधाई छे । अने त्यार पछी तेमां थी विसलनगरा नी नात जुदी पड़ी तेनुं कारण केहे छे के विसलदेव राजाओ विसल नगर बसावीने त्यां जगन कीधो हतो । त्यारे बडनगर थी केटलाओक नागरी त्यां जोवा गया हता । त्यारे राजाओ तेओ ने दक्षणा आपवा मांडी । त्यारे ओ नागर ब्राह्मणो ओ कह्यं के अमे कोई नी दक्षणा लेता नथी । त्यारे राजाओ कह्यूं के तमने पाननां बीडा आपी यूं । ओम कहीने पानना बीडा मां गाम नां नाम लखी नें ओ नागर ब्राह्मणों ने आप्यां । त्यारे ते ब्राह्मणो ओ पानना बीडां लीधां । तेमां जोयुं त्यारे गामनां नाम लख्या हतां । तेथी पछी तो ओ गाम लेवां कबूल कीधां । ओ बात बडनगरना नागरीओ जाणी त्यारे तेओ ओ कह्यूं के ओणे राजा नुं दान लीधूं वास्ते ओओ ६
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