पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 93, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ें८२ पृथ्वीराजरासौ । [ आदि पर्व संगाहू हस्त असवार * हुइ। फिरयौ राज घर आतुरह ॥ कं० ॥ ४०७ ॥ रू० ॥ १८८ ॥ आपणी नातथी बाहर छे । ते दिवस 'थी विसननगरानी नात जुदी थई । कोई कहे छे के तेज राजाओ तेज बखतमां साठोद गाम नूं नाम पान मां लखी ने जेने आप्यूं हतं ने साठोदरा नागर थया । चित्रोड़ लखी ने जेने आप्यूं ते चित्रोड़ा नागर थया । तेमज प्रश्नोरा तथा कृष्णोरा पण थया । ६ प्रकार ना नागरी नां नाम । बडनगरा नागर १ विसल नगरा नागर २ साठोदरा नागर ३ चित्रोडा नागर ४ प्रश्नोरा नागर ५ कृष्णोरा नागर ६ ॥ हवे विचार करो के विसलदेवे विसल नगर सं० ९३६ वीं साल मां वसाव्यूं ए प्रथिराजरासा मां चंद कविये लखेलूं छे ॥ दोहा ॥ सो संवत नव शत अधिक । वर्ष तीस छह अग ॥ पुर प्रतिष्ट वीसल नृपति । राजत सकले जग ॥ १ ॥ त्यार पछी विसननगरानी नात बंधाई छे । तेथी साफ जणाय छे के परमेश्वरे कांई नातो बांधी नथी । फक्त माणसोए जुदा जुदा बाडा बांध्या छे । त्यारे ते बंधाया थी हालमां जे हरकतो थती होय ते बंध करवा चहाय तो करी शके खरा । विसल नगराओ राजानूं दान लेवा थी जो बदलया होय तो हाल मां बड नगराओ मुसलमाननी सेवा करे छे तेओ एनाथी पण वटल्या कहेवाय । वास्ते एवो जूठो वेहेम छोड़ी देवो जोइये । अने जरूर समझवूं के तेओ एक बीजा थी कांई वटलाशे नही । इत्यादि ॥ ज्ञाति निबन्ध पृष्ठ ४३ से ४५ तक ॥ नागरखंडना अध्याय २३ पछी तेमां १०८ मा अध्याय थी ४ था अध्याय मां लखे छे के आनर्त्त देशना राजाए चमत्कारनामे शेहेर वसावी ते ७२ गोत्र ना ब्राह्मणों ने आपवा मांड्यां, तेमा ८ गोत्र नाए लीधां नही ने ६४ गोत्रनाए लीधां । पछी त्यां कांई कारण थी नागनी उत्पत्ति घणी थई तेओए घणां माणसोने करडी खाधां तेथी केटला ब्राह्मणो नाशी छुट्या । पछी एक अपमान करेले ब्राह्मणे (त्रिजटाकें) मन्त्र नो उपाय कस्यो तथा ए सउ ब्राह्मणो ए मलीने लाकड़ी पथरा वगेरे थी हजारो नागने मारी नांख्या त्यारे ए शेहेरनूं नाम नगर (भेर विनांनुं) ठन्यूं ने ते ब्राह्मणो नागर कहेवाया । पछी १५८ मां अध्याय मां लखे छेके एक पुष्पक नामने पुरुषे पर स्त्रीनो संग घणां वर्ष कस्यो, ते पछी पस्तावो करीने तेनूं प्रायश्चित करवा बडनगर मां आव्यो त्यारे सउ नागरी ए कह्यूं के ए पाप मटवानो उपाय नथी । त्यारे एकं चंडशर्मा नामने नागरे कांई प्रायश्चित करायूं, तेथी नागरीए चंडशर्माने नात बाहर मुक्यो तेथी बाह्य नगरानी वात जुदी बन्याई ॥ पृथ्वीराजरासा मां लख्यूं छेके बीसलनगर बसावनार बीसलदेव राजा पुष्कर क्षेत्रमां परस्त्रीनो सङ्ग कर्यो हतो, तेथी ते स्त्रीए श्राप दीधो हतो ने तूं असुर थईश । पछी ए पाप मटवानो उपाय बीसलदेव शोधतो हतो । वास्ते पुष्पक नामनो पुरुष नगर खण्ड मां लख्यो छे ते बीसलदेव सम्भवे छे । ने बाह्य नगरा जेोध्या छे. ते बीसलनगरा, साठोदरां वगेरे सम्भवे छे । इत्यादि० ज्ञात निबंध पृष्ठ ७५-७६ ॥
- यह हिन्दी शब्द संस्कृत अश्ववार अथवा, अश्व + आर अथवा अश्व + आर से बना है अरबी अथवा फारसी से अनुमान करना व्यर्थ है ॥ १८८ पाठान्तर :-पडुर । काकन । हुई । न्हांत । विप्र । को । वसाय । वीसल पुरह । मंगाय । छोड़ ॥