भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 94

आदि पर्व ] पृथ्वीराजरासो । ८३ ॥ बीसलदेवजी का पीछा अजमेर आना और सब कथा प्रसंग पवार जी रानी से कहना ॥ दूहा ॥ दो दिन के मग एक दिन । आए बीसल गेह ॥ किय प्रवेस नृप सहर * सें। सुचित्त भये गृह सेह ॥ छंद० ॥ ४०८ ॥ रू० ॥ १९९ ॥ ऊंच धाम बिसराम किय । रंग साल चतुरंग ॥ प्रौढा महल पवार सैं । कहिय सु कथा प्रसंग ॥ छंद० ॥ ४०९ ॥ रू० ॥ २०० ॥ ॥ सब काम-लुब्धाओं को शोच होना कि शंभू ने ऐसा क्या वर दिया ॥ ? चौपाई ॥ काम लुबध बोली सब कामनि । च्यार जाम गई जागत जामनि ॥ सब नारिन कौं सोच उपन्नौ । ऐसी कहा संभु वर दिन्नौ ॥ छंद० ॥ ४१० ॥ रू० ॥ २०१ ॥ ॥ बीसलदेवजी का कामान्ध हो अकर्तव्य कर्म करना ॥ कवित्त ॥ राति दिवस ण्क्कंसी । काम कामना सु वट्ठिय ॥ प्रौढ मुगध वय वृद्ध । सबै थरि धरि चिय गट्टिय ॥ पर घरनी लै दोन्नि । घरी नह विलंब लगावै ॥ जो विलंब करि रहै । ताहि इनिवे कौं आवै ॥ भै भीत काम बिसराम बिन । नाम सुनत औदिक परै ॥ अजमेर नैर बीसल नृपति । प्रमुदा देखत प्रज्जरै ॥ छंद० ॥ ४११ ॥ रू० ॥ २०२ ॥

  • हिन्दी सहर अथवा शहरि शब्द अरबी अथवा फारसी से नहीं है किन्तु संस्कृत स + हलि से ॥ SK. स + हलि = Agriculture, furrows, Hence a place where agriculturists reside, Dwelling & habitation, &c. The Hindi हर is also from the SK. हल A plough, the earth. In the same manner नगर a town is from नग a tree, a mountain & रल् off. १९९-२०० पाठान्तर :- कै । कैं । सेव ॥ धांम । महिलए । वारि । कौ । २०१ पाठान्तर :- कांम । याम गय । जांम । कों उपंनौ । असैं । खिंभु । दीनौन ॥ २०२ पाठान्तर :- कांम । कामना । बढिय तस । सबँ । हरत नारी जस । कौं । विलंब । ताहि के पहिन्ने तो विशेष है । भय । कांमं । विसदांम । नहि । नाम । उन्दकि मरै । नृपति । प्रजरै ॥