पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)

पृथ्वीराजविजय महाकाव्यम् (कवि जयानक - अजमेर चौहान साम्राज्य एवं सम्राट् पृथ्वीराज इतिहास)
Prithvirajavijaya Mahakavya of Jayanaka with Commentary
कश्मीरी कवि जयानक (टीकाकार: जोनरराज) द्वारा
DevanagariHindipublished330 पृष्ठ
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– ᴗ ᴗ – ᴗ – – Wait: त-गण: – – ᴗ त-गण: – – ᴗ ज-गण: ᴗ – ᴗ ग-ग: – – Wait: त त ज ग ग = Upajati / Indravajra is: त त ज ग ग (– – ᴗ, – – ᴗ, ᴗ – ᴗ, – –) Wait! Indravajra: स्यादिन्द्रवज्रा यदि तौ जगौ गः! तौ = त-गण, त-गण (– – ᴗ, – – ᴗ) ज = ज-गण (ᴗ – ᴗ) गौ = ग, ग (–, –) Total = 3 + 3 + 3 + 2 = 11 syllables! Let's check if Indravajra fits: Line 3: सम्बन्धिना वार्णवसप्तकस्य
- सम् (–)
- बन् (–)
- धि (ᴗ) -> त-गण (– – ᴗ)
- ना (–)
- वार् (–)
- ण (ᴗ) -> त-गण (– – ᴗ)
- व (ᴗ)
- सप् (–)
- त (ᴗ) -> ज-गण (ᴗ – ᴗ)
- कस्य (क is – due to sy, and final syllable is –):