प्रियदर्शिका नाटिका (सम्राट हर्षवर्धन - चतुरङ्क शास्त्रीय नाटिका सान्वय सटीक)

प्रियदर्शिका नाटिका (सम्राट हर्षवर्धन - चतुरङ्क शास्त्रीय नाटिका सान्वय सटीक)
Priyadarshika Natika of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
DevanagariHindipublished184 पृष्ठ
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राजा—(सधैर्यम्।) वयस्य त्वरिततरमभिधीयताम्। विदूषकः—भो त्वं तावदनेकसङ्गरसंघट्टप्रभावबाहुशाली। पुनरप्य- नेकगजतुरगपदातिदुर्षिहबलसमुदितः। तत्सर्वबलसंदोहेनान्तःपुरं सुपीड़ितं कृत्वेदानीमेवारण्यिकां मोचय। (भो तुमं दाव अणेअसमरसङ्घट्टप्पहावबाहु- साली। पुणो वि अणेअगअतुरगपदाइदुव्विसहबलसमुदिदो। ता सव्वबलसन्दोहेण अन्तेउरं सुपीड़िअं करिअ दाणिं एव्व आरण्णिअं मुचावेहि।) राजा—वयस्य अशक्यमुपदिष्टम्। विदूषकः—किमत्राशक्यम्। यतस्तावत्कुम्भवामनवृद्धकञ्चुकि- वर्जितो मनुष्योऽपरो नास्ति तत्र। (किं एत्थ असक्कं। जदो दाव कुम्भवमण- वुड्ढकञ्चुइवज्जि