भारतकोश
पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

Purnaprajna Bhashya of Sriman Madhvacharya with Commentary

श्रीमन् मध्वाचार्य (टीकाकार: जगन्नाथ यति / गोपालकृष्णाचार्य) द्वारा

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णे-न! The 'णे' has the e-matra, and 'न' is just 'न'! And there is just a slight space between 'णे' and 'न' due to movable type spacing: "लप्रमाणे न" or "लप्रमाणेन"! Of course! "मूलप्रमाणेन भाव्यम्"!

Line 12 end: "अन्य-" Line 13: "थाऽनाश्वासाद्यज्ञादेः पुण्यसाधनतादिबोधकवेदमूलं च भवत्प्रत्यक्षा-" End of line 13: "भवत्प्रत्यक्षा-"

Line 14: "नुमानयोरसम्भवात्परिशेषाद्वाक्यमेवेति वाच्यम्, तस्य चानित्यता-" End of line 14: "चानित्यता-"

Line 15: "मुपेत्य मूलान्वेषणेऽनवस्थापत्त्या नित्यत्वमेव वाच्यम्, ततो वरं वेद-" End of line 15: "वेद-"

Line 16: "स्यैव नित्यत्वाङ्गीकरणम्, श्रुतिसिद्धत्वादिति ॥"

Line 17: "( ९ ) न तु यथा वेदानित्यत्वे आप्त्यनिश्चयात्प्रामाण्याभावापत्ति-" End of line 17: "भावापत्ति-"

Line 18: "र्बाधिका, तथा तस्य नित्यत्वेऽप्याप्तोक्तत्व