पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)

पूर्णप्रज्ञ भाष्य (श्रीमन् मध्वाचार्य - द्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य जगन्नाथदीपिका सटीक)
Purnaprajna Bhashya of Sriman Madhvacharya with Commentary
श्रीमन् मध्वाचार्य (टीकाकार: जगन्नाथ यति / गोपालकृष्णाचार्य) द्वारा
DevanagariHindipublished1,267 पृष्ठ
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ः, किन्तु सर्वोऽपि ज्ञः पराभास इति सूत्रार्थ उक्तो भवति ॥` Matches!
* Now let's check line 30:
`( २ ) देवदानवादिवैचित्र्यस्य रागद्वेषमोहाख्यदोषनिमित्तकत्वो`
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* Now let's check line 31:
`पपत्तेः किमदृष्टकारणकत्वकल्पनयेत्याशङ्कां परिहरत्सूत्रमुपन्यस्य व्या`
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* Now let's check line 32:
`चष्टे—अभिसन्धीति ॥ न केवलं सुरनरादिवैचित्र्यं, किन्तु इच्छादि`
Wait, look at the pratika in L32:
`चष्टे—अभिसन्धीति ॥` or `अभिसन्ध्यादिष्वपि`?
In L32: `चष्टे—अभिसन्धीति ॥` or `अभिसन्धीति`?
Let's zoom in on `अभिसन्ध्वीति` or `अभिसन्धीति`:
Letters: `अ` `भि` `स` `न्ध्` ... wait, is that `धी` or `वी` or `ध्या`?
Look at: `अ-भि-स-न्धी-ति`?
Wait, the Sutra is: `अभिसन्ध्यादिष्व