रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)
Raghuvamsham of Kalidasa Hindi
महाकवि कालिदास द्वारा
स्रोत: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (उद्गम)
पृष्ठ 32, कुल 735 में से
संदर्भ में पढ़ें( १७ )
राजा कामदेव के समान सुन्दर अज को देखकर इन्दुमती के प्रति निराश हो गये। सुन्दर रंग-बिरंगे वस्त्रों से आच्छन्न रत्नजटित सिंहासन पर बैठे हुए अज अनेक रंगवाली मोर की पीठ पर बैठे हुए कार्तिकेय जैसे लग रहे थे।
जिस प्रकार प्रफुल्लित वृक्षों को छोड़कर भंवरें मद बहाने वाले जंगली हाथी के ऊपर झुक जाते हैं उसी प्रकार नागरिक दर्शकों की दृष्टि सब राजाओं को छोड़कर अज पर ही आ डटी। अनन्तर राजाओं के वंशों के जानकार बन्दीजन चन्द्रवंशी एवं सूर्यवंशी राजाओं का गुण-गान करने लगे, सुगन्धी धूपबत्ती का धुंआँ आकाश में फैल गया तथा माङ्गलिक बाजे बजने लगे। इसी समय भोजराज की छोटी बहन इन्दुमती पालकी में बैठकर अपनी सखी सुनन्दा के साथ मञ्चों के बीच बने राजमार्ग से स्वयंवर स्थल पर आ पहुँची। विधाता की अद्वितीय सृष्टि सर्वाङ्गसुन्दरी उस इन्दुमती को देखकर सभी राजा अपने मन के भावों को विविध प्रकार की चेष्टाओं से व्यक्त करने लगे। सात पद्यों में कवि ने विभिन्न राजाओं की श्रृङ्गार चेष्टाओं का चमत्कारपूर्ण वर्णन किया है, जिनका अभिप्राय राजाओं ने अपने मन के अनुकूल समझा तथा इन्दुमती ने इसके विपरीत सबको कुलक्षणी समझा। स्वयम्बर में विराजमान राजाओं का नैसर्गिक वर्णन अतिरोचक ढंग से उपस्थित किया गया है। सबसे पहले मगध देश के राजा का वर्णन है।
राजाओं के चरित्र एवं वंशावली को जानने वाली पुरुषों के समान धृष्ट रनिवास की द्वारपालिका सुनन्दा, इन्दुमती को मगधनरेश परन्तप के समक्ष उपस्थित कर कहने लगी राजकुमारी! इस भूमण्डल में अनेक राजाओं के रहते हुए भी पृथ्वी इन्हीं से राजन्वती है। इन्होंने निरन्तर अपने यज्ञानुष्ठान में इन्द्र को बुलाकर इन्द्राणी को चिरवियोगिनी बना दिया है। यदि इन्हें वरण कर लोगी, तो अपने-अपने महलों में बैठी पुष्पपुर की महिलाओं को आनन्दित करोगी। परन्तप इन्दुमती को नहीं जचे। उसने सुनन्दा को आगे बढ़ने का इशारा किया। बाद सुनन्दा ने अङ्ग देश के राजा को दिखाकर कहा—ये भूलोक में भी स्वर्गीय सुख भोगते हैं। इनके पास एक साथ लक्ष्मी एवं सरस्वती दोनों रहती हैं। अतः कान्तिमती एवं मधुरभाषिणी तुम तीसरी हो जाओ, किन्तु इन्दुमती की रुचि न होने से सुनन्दा उसे उज्जयिनी के राजा के पास ले जाकर कहने लगी—ये महाप्रतापी राजा महाकाल के समीप रहते हैं। अतः कृष्ण पक्ष में भी ये चांदनी रातों का उपभोग करते हैं। यदि तुम सिपरा नदी की