भारतकोश
रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

Raghuvamsham of Kalidasa Hindi

महाकवि कालिदास द्वारा

स्रोत: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (उद्गम)

DevanagariHindipublished735 पृष्ठ

पृष्ठ 582, कुल 735 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 582

पञ्चदशः सर्गः ५२३

**भाषार्थ—**पतिव्रता सीता के ऐसा कहते ही पृथ्वी फट गई और उसमें से बिजली के समान चमकीली एक ज्योति ऊपर निकली ॥ ८२ ॥

तत्र नागफणोत्क्षिप्तसिंहासननिषेदुषी।
समुद्ररशना साक्षात्प्रादुरासीद्वसुन्धरा ॥ ८३ ॥

**अन्वयः—**तत्र नागफणोत्क्षिप्तसिंहासननिषेदुषी समुद्ररशना साक्षात् वसुन्धरा प्रादुरासीत् ।

तत्रेति । तत्र प्रभामण्डले नागफणोत्क्षिप्ते सिहासने निषेदुष्यासीना समुद्ररशना समुद्रमेखला साक्षात् । वसूनि धारयतीति वसुन्धरा भूमिः । “खचि ह्रस्वः” इति ह्रस्वः । प्रादुरासीत् ।
**भाषार्थ—**उसमें से नाग के फनों के ऊपर रखे हुए सिंहासन पर बैठी हुई समुद्र की करधनी पहने साक्षात् पृथ्वी माता प्रकट हो गयी ॥ ८३ ॥

सा सीतामङ्कमारोप्य भर्तृप्रणिहितेक्षणाम्।
मा मेति व्याहरत्येव तस्मिन्पातालमभ्यगात् ॥ ८४ ॥

**अन्वयः—**सा भर्तरि प्रणिहितेक्षणां सीताम् अङ्कम् आरोप्य तस्मिन् मा मा इति व्याहरति एव पातालम् अभ्यगात् ।

सेति । सा वसुन्धरा भर्तरि प्रणिहितेक्षणां दत्तदृष्टि सीतामङ्कमारोप्य तस्मिन्भर्तरि रामे मा हरेति व्याहरति वदत्येव व्याहरन्तमनादृत्येत्यर्थः । “षष्ठी चानादरे” इति सप्तमी । पातालमभ्यगात् ।
**भाषार्थ—**वह पृथ्वी माता उस सीताजी को अपनी गोद में लेकर पाताल में समा गई रामको एक टक से देख रही थीं और राम कहते ही रह गये कि हैं हैं यह क्या कर रही हो, यह क्या कर रही हो ॥ ८४ ॥

धरायां तस्य संरम्भं सीताप्रत्यर्पणैषिणः ।
गुरुर्विधिबलापेक्षी शमयामास धन्विनः ॥ ८५ ॥

**अन्वयः—**सीताप्रत्यर्पणैषिणः धन्विनः तस्य धरायां संरम्भं विधिबलापेक्षी गुरुः शमयामास ।

धरायामिति । सीताप्रत्यर्पणमिच्छतीति तथोक्तस्य धन्विन आत्तधनुस्तस्य रामस्य धरायां विषये संरम्भं विधिबलापेक्षी दैवशक्तिदर्शी गुरुर्ब्रह्मा शमयामास । अवश्यम्भावी विधिरिति भावः ।
**भाषार्थ—**राम को पृथ्वी पर बड़ा क्रोध आया और पृथ्वी से सीता को लौटा लेने के लिए उन्होंने अपना धनुष उठाया किन्तु वसिष्ठ और वाल्मीकि ने