रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)
Raghuvamsham of Kalidasa Hindi
महाकवि कालिदास द्वारा
स्रोत: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (उद्गम)
DevanagariHindipublished735 पृष्ठ
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६५६ | रघुवंशमहाकाव्ये
| पाद / श्लोक | सर्गे | श्लोकः | पाद / श्लोक | सर्गे | श्लोकः |
|---|---|---|---|---|---|
| न मृगयाभिरतिर्न दु | ९ | ७ | निर्वाप्य प्रियसंदेशैः | १२ | ६३ |
| न मे ह्रिया शंसति किं | ३ | ५ | निर्विष्टविषयस्नेहः स | १२ | १ |
| नमो विश्वसृजे पूर्वं | १० | १६ | निर्वृत्तजाम्बूनदपट्ट | १८ | ४४ |
| नयगुणोपचितामिव | ९ | २७ | निर्वृष्टलघुभिर्मेघै | ४ | १५ |
| नयविद्भिरनंवे राज्ञि | ४ | १० | निवर्त्य राजा दयितां | २ | ३ |
| नरेन्द्रमूलायतनाद | ३ | ३६ | निवृते स महार्णव | ९ | १४ |
| नवपल्लवसंस्तरेऽपि | ८ | ५७ | निवातपद्मस्तिमिते | ३ | १७ |
| नवेन्दुना तन्नभसोपमे | १८ | ३७ | निविष्टमुदधेः कूले तं | १२ | ६८ |
| न संयतस्तस्य बभूव | ३ | २० | निवेश्य वामं भुजमास | ६ | १६ |
| नातिपर्याप्तमालक्ष्य म | १५ | १८ | निशम्य देवानुचर | २ | ५२ |
| नाभिप्ररूढाम्बुरुहास | १३ | ६ | निशाचरोपप्लुतभर्तृका | १४ | ६४ |
| नाम राम इति तुल्यम | ११ | ६८ | निशासु भास्वत्कलनूपु | १६ | १२ |
| नाम वल्लभजनस्य ते | १९ | २४ | निःशेषविक्षालितधा | ५ | ४४ |
| नाम्भसां कमलशोभिनां | ११ | १२ | निसर्गभिन्नास्पदमक | ६ | २९ |
| निगृह्य शोकं स्वयमेव | १४ | ८५ | नीपान्वयः पार्थिव एष | ६ | ४६ |
| निग्रहात्समुराप्तानां व | १२ | ५२ | नीवारपाकादि कडंग | ५ | ९ |
| निश्चित्य चानन्यनिवृत्ति | १४ | ३५ | नूनं मत्तः परं वंश्याः | १ | ६६ |
| नितम्बगुर्वी गुरुणा | ७ | २५ | नृत्यं मयूराः कुसुमानि | १४ | ६९ |
| निद्रावशेन भवता | ५ | ६७ | नृपतिः प्रकृतीरवेक्षि | ८ | १८ |
| निधानगर्भामिव सा | ३ | ९ | नृपतेः प्रतिषिद्धमेव | ९ | ७४ |
| नियुज्य तं होमतुरंग | ३ | ३८ | नृपतेर्व्यजनादिभिस्त | ८ | ४० |
| निर्घातोयैः कुञ्जलीनाञ्जि | ९ | ६४ | नृपं तमावर्तमनोज्ञ | ६ | ५२ |
| निर्दिष्टां कुलपतिना स | १ | ९५ | नृपस्य वर्णाश्रमपाल | १४ | ६७ |
| निर्दोषमभवत्सवं | १० | ७२ | नेत्रव्रजाः पौरजनस्य | ६ | ७ |
| निर्बन्धपृष्ठः स जगाद | १४ | ३२ | नेपथ्यदर्शनिष्ठछाया त | १७ | २६ |
| निर्बन्धसंजात रुषा | ५ | २१ | नैर्ऋतघ्नमथ मन्त्रव | ११ | २१ |
| निर्यायावथ पौलस्त्यः पु | १२ | ८३ | न्यस्ताक्षरामक्षरभूमि | १८ | ४६ |
| निर्वर्त्यते यंनियमा | ५ | ८ | प | ||
| निर्वर्त्यैवं दशमुखशि | १५ | १०३ | पक्षच्छिदा गोत्रभिदात | १३ | ७ |