राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११४ राजतरंगिणी स नरेन्द्रश्रिया सार्धं लब्धवान्बालभूपतिः। नाम गोनन्द इत्येवं नप्ता पैतामहं क्रमात् ॥ ७६ ॥ ७६. उस बाल भूपति ने राजश्री के साथ ही साथ समय पर अपने पितामह का नाम¹ गोनन्द भी प्राप्त किया। आस्तां बालस्य संनद्धे द्वे धात्र्यौ तस्य वृद्धये । एका पयःप्रस्रविणी मर्वसंपत्प्रसूः परा ॥ ७७ ॥ ७७. बालक के धार्धवयपरिचर्या निमित्त दो धात्रियों सन्नद्ध रहती थीं। एक पयःप्रस्रविणी धात्री तथा दूसरी सर्वसंपत्प्रसूता पृथ्वी थी। अराजकता रोककर, स्थिति सुदृढ़ कर ले। अपने विरोधियों का इस काल में कंटक शोधन करे। राजा के मन्त्री थे। उसकी सेना थी। उसकी अभिभाविका उसको मां थी। राजा की संरक्षिका थी। केवल माता यशोवती नहीं अपितु मन्त्रिमण्डल प्रत्येक कार्यों के लिए, राजकार्य के लिए, उत्तरदायी था। राजमाता यशोवती केवल अभिभाविका तथा संरक्षिका मात्र थी। वह कश्मीर मण्डल को विधि- पूर्वक राजा नहीं थी। उसका प्रत्येक कार्य मन्त्रि- मण्डल के मन्त्रणानुसार होना आवश्यक था। यशोवती को मन्त्रिमण्डल की मन्त्रणाओं को टालने किंवा मानने का अधिकार था या नहीं इस सूक्ष्म विवेचन पर कहीं प्रकाश नहीं डाला गया है। शिशु राजा के वयस्क होने तक यशोवती देवी का राज्यानुशासन एवं राज्य कार्यों के विषयों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण स्थान रहा होगा। पाठभेद : श्लोक संख्या ७६ में 'नरेन्द्र' का पाठभेद 'नगेन्द्र' तथा 'गोनन्द' का 'गोनर्द' मिलता है। पादटिप्पणियाँ : ७६ (१) नामकरण संस्कार : कश्मीर में प्रचलित संस्कार के अनुसार जातकर्म संस्कार के एक दिन पश्चात् नामकरण संस्कार अर्थात् शिशु का नाम रखा जाता है। कल्हण का वर्णन यहाँ पूर्ण प्रामाणिक तथा युक्ति संगत प्रतीत होता है। जरासन्ध के साथ मथुरा में गोनन्द सम्मिलित हुआ था। उस समय उसका पुत्र दामोदर युवक था। युवराज था। उसकी पत्नी यशोमती को कोई सन्तान नहीं थी। केवल एक सन्तान गर्भ में थी। भगवान् कृष्ण मथुरा युद्ध के पश्चात् गान्धार स्वयंवर में गये थे। युवक राजा दामोदर ने उनपर आक्रमण किया। पिता गोनन्द युद्ध में कृष्ण के भाई बलराम द्वारा तथा पुत्र दामोदर स्वयं कृष्ण द्वारा मारा गया था। इससे प्रकट होता है कि गोनन्द युद्ध करने योग्य था। वह वृद्ध नहीं था। उसका पुत्र दामोदर उनके साथ मथुरा सम्भवतः नही गया था। यदि वह गया होता तो शायद वह भी वही वीरगति प्राप्त करता। मालूम होता है कि मथुरा में जरासन्ध के आह्वान पर जाते समय गोनन्द अपने वयस्क पुत्र को कश्मीर की राज्य-व्यवस्था के लिए छोड़ गया था। दामोदर की अवस्था मैं समझता हूँ उस समय २० से २५ वर्ष की और गोनन्द की ५० वर्ष के भीतर रही होगी। यशोमती से एक ही सन्तान के वर्णन से सिद्ध होता है, कि यशोमती युवती मात्र थी। गोनन्द के मथुरा युद्ध में हत होने के कुछ ही समय पश्चात् दामोदर भगवान् कृष्ण से युद्धार्थ गान्धार गया होगा। यह बात राजतरंगिणी के ८२ वें श्लोक से और स्पष्ट हो जाती है कि बालक होने के कारण कौरव-पाण्डवों ने उसे युद्धार्थ आमन्त्रित नहीं किया था। बालक राजा द्वितीय गोनन्द की अवस्था महाभारत काल में कठिनता से तीन या चार