राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
पृष्ठ 206, कुल 984 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रथम तरंग १२३ कुशेशयाक्षस्तत्पुत्रः प्रतापकुशलः कुशः । कुरुहाराग्रहारास्य दाताऽभूत्तदनन्तरम् ॥ ८८ ॥ कुश ८८. उसके पश्चात् उसका कुशेशयाक्ष प्रताप कुशल पुत्र कुश १ जिसने कुरुहार २ अग्रहार दान किया था राजा हुआ । जागीर देने की वर्तमान प्रथा पुराने अग्रहार प्रथा पर आधारित हैं । मुसलिम, सिख तथा डोंगरा काल में भी यह प्रथा प्रचलित थी । (३) लेवार : लिदर नदी के दक्षिण तटपर वर्तमान ग्राम लिवार है। इसे लेवरा भी कहते हैं। लिदर नदी वितस्ता नदी में अनन्त नाग तथा ब्रिज- ब्रोर के मध्य में मिलती है । वितस्ता की सहायक नदी है । सिंधु उपत्यका के ऊर्ध्वभाग का पर्वतीय जल लाती हैं । नीलमत पुराण में इस ग्राम का उल्लेख है । भूर्जस्वामी हिडिम्बेपु लोमारः श्रीविनायकः । उच्चैकेषु गुहावासी मीमेषु सौमुलस्तथा ॥ 992 : ११९३ जोनराज ने अपनी राजतरंगिणी में लेद्री किंवा लेदरी का उल्लेख किया है । उसका कहना है कि वितस्ता लेद्री, सिन्धु, तथा क्षिप्रिका नदियाँ परस्पर अपने समीपवर्ती ग्रामो एवं भूमिखण्ड को जल प्लावित करने में स्पर्धा करती थीं । ( जो० १०६, १०८) श्रीवर एक युद्ध के प्रसंग में वर्णन करता है । चक्रेश के नेतृत्व में मार्ग पति से चक्रधर की ओर से आकर वामतट से नदी पार कर बादशाह से मिल गये । ( श्लोक : २२२ ) मुझे लेवार, सोलोव ग्राम तथा लोलोव का उल्लेख जोनराज, श्रीवर, शुक की राजतरंगिणियो में नहीं मिला । इन पुस्तकों में नामानुक्रमणिका उपलब्ध न होने के कारण और कठिनाई पड़ी है । निस्सन्देह नीलमत वर्णित लोभार का अपभ्रंश लोहार हो सकता है । पाठभेद : श्लोक संख्या ८८ में 'कुशेशयाक्षं' का 'कुशेश- याक्ष्यं' तथा 'कुरुहाराप्रहार' का पाठभेद 'कुलर' मिलता है । पादटिप्पणियाँ : ८८(१) कुश : राजतरंगिणीकारने लव, कुश का क्रम कश्मीर के राजाओं में एक के बाद दूसरा रखा है। लव निर्वाचित राजा कश्मीर का था। अतएव वह बाहरी व्यक्ति था । राम के पुत्र लव से लवकुश को मिलाना ठीक नहीं होगा। पुराणों के आधार पर लव कुश के भाई तथा उत्तरकोसल के राजा थे । इनकी राजधानी श्रावस्ती थी । (पुराण भागवत ९:११:११; पुराण ब्रह्माण्ड ३:६३:१९८; पुराण वायु ८८:२००) आइने अकबरी में राजा का नाम किरोन तथा राज्यकाल ७ वर्ष दिया गया है । हसन ने राजा का नाम 'कोशिशी' दिया है । राज्य काल १३ वर्ष लिखा है । कुश नाम के कई व्यक्ति हुए हैं । राम के पुत्र कुश थे । कुश के पुत्र अतिथि थे । कुशस्थली को उन्होंने अपनी राजधानी बनाया था । ( पुराण वायु ८८:१९८, विष्णु पुराण ४:४:४७, भागवत पुराण ६:११:११, मत्स्य पुराण १२:५१; ब्रह्माण्ड पुराण ३१३:१९८।) राम ने उत्तरकोसल का राज्य कुश को दिया था । उसकी राजधानी श्रावस्ती थी । विदर्भराजा के तीन पुत्रों में एक पुत्र कुश का उल्लेख भागवत पुराण ९:२४:१ में आता है । कुश नामक एक जाति का उल्लेख मिलता है । ( ब्रह्माण्ड पुराण ३:७४:१६८; मत्स्य पुराण २७४:७२ ) भागवत पुराण के अनुसार सुहोत्र राजा के तीन पुत्रो में दूसरा कुश था ।