राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३० राजतरंगिणी तस्य सूनुः सुवर्णाख्यस्ततोऽभूत्स्वर्णदोऽर्थिनाम् । सुवर्ण सुवर्णमणिकुल्यायाः कराले यः प्रवर्तकः ॥६७॥ ९७. उसके पश्चात् य.चकों का सुवर्ण१ दाता उसका पुत्र सुवर्ण राजा हुआ। उसने कराल२ में सुवर्ण मणि कुल्या३ लाया।
बसाया था। यहाँ कोई ध्वंसावशेष नही मिलता। बड़ा नगर आबाद होने योग्य स्थान नहीं है। सम्भव है प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक उथल-पुथल में उनका प्राचीन रूप नष्ट हो गया तथा बचे-खुचे ध्वंसावशेषों का उपयोग वही ओर हो गया हो। (२) हस्तिशाला : गुदर से लगभग १ मील उत्तर-पूर्व विशांका नदी के बलुए द्वीप पर हस्तिशाला स्थित है। इसे अस्ति हेल कहते हैं। मालूम होता है कि हेलराज द्वारा उल्लिखित राजा गोधर के कारण कल्हण तथा पद्ममिहिर का ध्यान इस ग्राम की ओर गया होगा। यहाँ गोधर राजा सम्बन्धी कुछ गाथा प्रचलित है। गोधर का अर्थ होता है। गाय का स्थान गोशाला। ६७(१) सुवर्ण : आइने अकबरो सुरेन नाम देती है। हसन लिखता है कि सन् ११६६ क० में राजा सुवर्ण गद्दी पर बैठा। उसने आडोन का परगना आबाद किया। राज्य-काल ३५ वर्ष कहता है। (२) कराल : जोन राज (८६१-६२) तथा श्रीवर ने (३:१९४) अपनी राजतरंगिणियो में कराल का उल्लेख किया है। वहाँ बडशाह जैनुल आबदीन ने जैनपुरी परगना कराल विषय मे बसाया था। जैनपुरी (दत्त ४७,२४८) वर्तमान जैनपुर है। यह अद्विन अर्धवन परगना की अधित्यका में रामब्यार नदी के दक्षिणी क्षेत्र का बाधक है। यही क्षेत्र कराल है। हैदर मलिक ने भी राजा सुवर्ण के कार्य स्थान का सम्बन्ध इससे जोड़ा है। (३) सुवर्ण मणि कुल्या : कुल्या शब्द वैदिक है। ऋग्वेद में यह उस नहर के लिए व्यवहृत किया गया है जो किसी शोल किंवा हृद में गिरती अथवा मिलती है। (ऋग्वेद ३:४५:३; १०:४३:७;)
कश्मीर की अनेक कुल्याएं इन लेक तथा उत्तर लेक में मिलती हैं या उनसे निकाली गयी हैं। पुराणों में मुल्या का उल्लेख मिलता है : त्रिसामा ऋषिकुल्या च इक्षुला त्रिदिवा च या । लांगलिनी वंशधरा महेन्द्र-तनया स्मृता ॥ ऋषिकुल्या कुमारी च मन्दगा मन्दवाहिनी । क्रिया पलाशिनो चैव शुक्तिमत्प्रभवाः स्मृताः ॥ त्रिसादा ऋषिकुल्याद्या महेन्द्रप्रभवाः स्मृताः । ऋषिकुल्या कुमारांद्याः शुक्तिमत्पादसम्भवाः ॥ मार्कण्डेय पुराण में 'पितृ सामपि कुल्पा; 'वायु पुराण में 'त्रिसामा ऋषिकुल्या,' 'त्रिसामा ऋतु कुल्या,' ब्रह्माण्ड पुराण में 'त्रिमामा ऋषिकुल्या,' विष्णु पुराण में 'त्रिसामा ऽचार्यकुल्यायाः,' 'ऋषि कुल्या कुमार्याद्या', ब्रह्माण्ड पुराण में 'त्रिसाग्य- ष्टाष्टि कुल्याया,' 'त्रिमाया ऋषिकुल्याया' तथा 'ऋषिकुल्या कुमाराया' का उल्लेख आया है। कूर्म पुराण में 'ऋषिकुल्या त्रिसामा', मत्स्य पुराण में 'त्रिभागा ऋषिकुल्या' का उल्लेख मिलता है। ऋषिकुल्या नामक एक धारा बरहमपुर के दक्षिण पूर्वी रेलवे स्टेशन पर स्थित गंजाम जिला उत्कल प्रदेश के समीप बंगाल की खाडी में गिरती है। एक दूसरी ऋषिकुल्या और धारा है। उसे छोटा नागपुर में कोइल कहते हैं। कुल्या का अपभ्रंश कोइल हो गया। तीसरो ऋषिकुल्या गंगा की एक सहायक नदी कियुल है। कियूल शब्द भी कुल्या शब्द का अपभ्रंश है। कुल्या शब्द वैदिक काल से अब तक जलधारा के लिए मुख्यत. वे धाराएं जो जल सिंचन निमित्त निकाली गयी है, प्रयुक्त होता रहा है। नाला शब्द