राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६० राजतरंगिणी
नेकनामी हासिल की। मुल्क की आबादी में हद दरजा कोशा रहा। लार में मौजा बारहमूला उसी की तासीरात में से है। कल्हण पण्डित ने उसे फरिश्ता सीरत जानकर अच्छी अच्छी खूबियों से मुत्तसफ इंसान साबित किया है। पण्डित उद्भट्ट जो अपने वखत का एकता था उसी के तरतीययाफ्तो में से था। उसके कहने सुनने से राजा जलौक ने फोरन् बुद्धमजहब छोड़ दिया। और अपने बाप के बर खिलाफ शेव मजहब अख्तियार कर लिया। विजयेश्वरी और नन्दह किशोर मन्दिरों की पूजा पाठ अपने ऊपर लाजिम कर ली। सख्त रियाजतो और वहानी सफाई और करावतो के पेश नजर अपने जमाना का एकता था।
कफ—'कहते हैं कि हर दिन वाडू वेजवारह और बारहमूला के मन्दिरो की पूजा-पाठ के लिए घोड़ो पर सवार होकर जाया करता था। एक सांप तावा किया हुआ था। जिस पर हर दिन सवार होकर जहाँ चाहता था पहुँचता था। यह साँप उसे बाकी सांपो से भी बचाता था। शिवजी के तमाम मन्दिरो को निहायत उम्दगी से सजाया। इसके जमाने मे बुद्धमजहब की कोई रौनक न रही।
'मशहूर है कि एक औरत ने उससे सवाल किया कि मुझे कुछ बतौर खैरात के दे। राजा ने कहा कि जो मांगेगी दूँगा। इसके बाद औरत मजकूर देवी की शक्ल में मुतशक्ल हो गयी। और राजा से इन्सान का गोश्त मांगा। राजा किसी इन्शान के कतल पर राजी न हुआ। और खुद उसके हवाला कर दिय'। देखकर उस औरत ने इन्तहाई खुशी के साथ राजा के हक में तौफीक इबादन की दुआ माँगो—फकत।
'बाद अजई राजा ने मुल्को के फतह करने का पुख्त. इरादा कर लिया। सर जमीन हिन्दुस्तान मुल्क में कन्नोज और बिहार तक के बहुत से शहर अपने कब्जा अख्तियार मे कर लिये। तिमिर नाशक के कोल के मुताबिक कन्दहार और वाख्तर तक के बहुत से शहरो पर अपना कब्जा और इक्तदार जमा लिया। गाम गाम के मुल्को और इलाको की फतह के बाद जब अपने मुल्क को लोटा तो बहुत से दस्तकार और अहल पेशा आदमी उमरे साथ थे। अपने मुल्क की दौलतमन्दी और शान व शोकत इम दरजा तक पहुँचा दी कि दूर दराज के इलाको के रहने वाले लोगो के दिल उसे सुनकर बाग बाग हो जाते थे। उसके वखत तक कश्मीर में मुल्की ओहदेदारों का इन्तजाम न था। राजा ने मुल्की मुआमलात के इन्तजाम को चलाने के लिए अजखुद आफ़िसर मुकर्रर किये। भोर उन्हें अपने फराइज का जवाब देह करार दिया। जो ओहदेह जात इस राजा ने पैदा किये उनकी तफसोल हस्व जैल है।
(१) उहदा दिवानी—इसके जिम्मा मुल्को लेन देन का इन्तजाम था। (२) उहदा खानसामानी—इसके जिम्मा खजानो की हिफाजत और आमदनियों का हिसाव व किताब था। (३) दारोगा फोरखाना—इसका काम फौज के हथियार, लिवाम और सामान वगैरह को हिफाजत था। (४) बख्शी—फौज की इन्तजाम के लिये। (५) वजारत—बादशाह की राय और मशविरा के लिए। (६) दारोगा मदर—खैरात और सदकात की तक्सीम के लिए। (७) नकीब—सिपाहियो और किसानो की खबरगोरो के लिये।
अलगरज हकूमत के इन्तजाम को पुस्तगो और अद्दल व इन्साफ, सखावत और रास्त बाजी में लाशानी था। कहते हैं कि गोटी नीद नाम की एक दवाई पाई थी। जिससे सोना बनाया करता था। इल्म सीमया बखूबी जानता था। आखिर कार कपाल मोचन के मुकाम जो कसवा सूपियान में सोनगुल नहर का मुन्बथ है राहे बहक हो गया। उसको वीवी ईशान देवी इन्तहाई दरजा की रियाजत कीश भोर बाहिम्मत औरत थी। उसके मादर चकर और हस्त