भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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पृष्ठ 300

प्रथम तरंग २११ अथाऽशोककुलोत्पन्नो यद्वाऽन्याभिजनोद्भवः । भूमिं दामोदरो नाम जुगोप जगतीपतिः ॥ १५३ ॥ १५३. तत्पश्चात् अशोक कुलोत्पन्न अथवा अन्य कुलोद्भव दामो र नामक राजा भूमि- रक्षक हुआ । ऋद्ध्या जाज्वलितस्योच्चैर्माहेश्वरशिखामणेः । अद्यापि श्रूयते यस्य प्रभावो भुवनाद्भुतः॥ १५४ ॥ १५४. ऋद्धि से जाज्वल्यमान, माहेश्वर२ शिवउ सकों में शिखामणि, जिस राजा के अद्भुत प्रभाव की गाथा भुवन मे आज भी सुनी जाती है । जलोक योगी अवधूत का शिष्य था । उसने योगा- भ्यास किया । जल का बांधन, उसके अन्दर प्रवेश कर रहना यौगिक क्रियाओ से सम्बन्ध रखता है । उसका अन्तिम समय में योग द्वारा प्राण विसर्जन करना उसे राज योगी के साथ ही साथ राजर्षियो की श्रेणी में रख देता है । १५३ (१) दामोदर द्वितीय : आइने अकबरी ने राजा का नाम दामोदर दिया है । उसके अनुसार कुछ लोंगो का कहना है वह अशोक का वंशज था । कुछ कहते हैं, वह अन्य वंश का था । राजा धार्मिक था । एक भक्त को अपमानित करने के कारण उसके शाप द्वारा सर्प हो गया था । कल्हण ने दामोदर द्वितीय की इतिहास सामग्री छविल्लकार से ली है। तत्कालीन प्रचलित ग्रन्थो, शिलालेखों, अग्रहारो एवं मन्दिरों में प्राप्त कुछ संग्रहों पर दामोदर द्वितीय का वर्णन किया है । मुहम्मद आजिम इतिहासकार के अनुसार दामोदर उद्र वह स्थान है, जहाँ ब्राह्मणो ने राजा को सर्प होने का शाप दिया था। यह सरोवर राजधानी मे ७ मील पर है । यहाँ अब भी कथा प्रचलित है कि राजा सर्प के रूप में इस स्थान पर प्रकट. होता है । हुसन लिखता है—दामोदर राजा जलोक का भाई था । पसन्दी और उमद. खूबियो में उसका हमसर था । तख्त सल्तनत पर बैठकर मख्लूक खुदा को अद्ल और अहसान के जरिए आराम असाइश बख्शी । मौजा 'गोट सवू' इसी राजा का बनाया हुआ है । करेवा दामोदर पर अपनी राजधानी के लिए कशोर इमारतो वाला एक शहर तामीर किया । कैफियत-एक दिन श्राद्ध के तकरीब पर दरयाए झेलम पर गुशल के लिए जाता था । रास्ते में दो बरहमनो ने उससे खाना माँगा । राजा ने कहा । गुशल और श्राद्ध के बाद मैं तुम्हें खीर कर दूँगा । इस पर इन बरहमनो ने राजा के हक में दुआए बद कर दी । इसके नतीजे में राजा की शक्ल साँप की हो गयी । बरसो तक राजा मजकूर जंगलों में परेशान था । इस वांकया की पूरी तफसील करेवा दामोदर के जिकर में गुजर चुकी है । राजा दामोदर की मुद्दत सल्तनत ३२ साल थी । हसन के वर्णन का कोई आधार तथा सत्यता नही हैं । कल्हण निश्चित नही कहता कि दामोदर कौन था । ? उसकी वंश परम्परा क्या थी ? इतना अवश्य निश्चयपूर्वक उसके वर्णन से निष्कर्ष निकाला जा सकता है । वह जलोक का पुत्र नही था । अशोक का वंशज हो भी सकता है और नहीं भी । इसका केवल मात्र अनुमान किया जाता है । प्रत्यक्ष प्रमाण अभी तक नही मिल सका है । हसन का यह कहना कि वह राजा जलोक का भाई था किसी प्रमाण से अबतक सिद्ध नही हो सका है । वह किस कुल का था ? किस प्रकार कश्मीर का राज्य प्राप्त किया ? उसके उत्तराधिकार का रूप क्या था ? सभी कुछ अज्ञात इतिहास के गर्भ में है ।