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राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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प्रथम तरंग २५७ चतुःशालामठस्यान्तः कृतायाऽदायि भूभुजा । वटेश्वराय निखिलं तेन कश्मीरमण्डलम् ॥ १९५ ॥ १९५. चतुःशाला मठ¹ में स्थापित वटेश्वर पर उस राजा ने निखिल कश्मीर मण्डल चढ़ा दिया था। पञ्चत्रिंशतमब्दानां क्ष्मां बुभोज महाभुजः । रावणक्षोणिभृत्सूनुः सार्धामन्यो विभीषणः ॥ १९६ ॥ १९६. रावण का पुत्र महाभुज विभीषण¹ राजा हुआ । उसने पैंतीस वर्ष छह मास पृथ्वी का राज्य किया । किंनरापरनामाऽथ किंनरैर्गीतविक्रमः । विभीषणस्य पुत्रोऽभून्नरनामा नराधिपः ॥ १९७ ॥ १९७. जिस नर¹ किंवा किन्नर राजा का विक्रम गीत किन्नर² गाते हैं। वह अपने पिता विभीषण के पश्चात् नराधिप हुआ । पाठभेद : श्लोकसंख्या १९५ में 'शाला' का 'शाल' तथा 'कश्मीर' का पाठभेद 'काश्मीर' मिलता है । पादटिप्पणियाँ : १९५ (१) वटेश्वर तथा चतुःशाला मठ : इस अद्भुत वटेश्वर लिंग का पुनः राजतरंगिणी में कहीं उल्लेख नहीं करता । उनका स्थान किस दिशा अथवा स्थान में था । कल्हण के समय तक दोनों का अस्तित्व था । वे इतने प्रसिद्ध थे कि कल्हण ने उनके स्थानादि का वर्णन करना साधारण बात समझकर नहीं किया । आगरा से ३० मील दक्षिण-पूर्व यमुना के दक्षिण तट पर वटेश्वर है । आज भी बैलों का मेला लगता है । यह प्राचीन नगर है। यहाँ प्राचीन खण्डहर तथा ध्वंसावशेष हैं। यह वटेश्वर महादेव का स्थान है । तीर्थ है । इसी के आधार पर या मौलिक रूप से वटेश्वर के मन्दिर में वटेश्वर महादेव की स्थापना निमित्त निर्माण कराया गया होगा । काश्मीर मण्डल को राजाओं ने कई बार भगव-दर्पण किया है। कनिष्क ने समस्त कश्मीर धर्म हेतु अर्पित कर दिया था । मेवाड़ के राजा भी अपना राज्य एकलिंग का मानते थे । भारतीय स्वतन्त्रता ३३ के पूर्व स्वयं अपने को भगवान् का सेवक समझ राज्य की व्यवस्था करते थे । पाठभेद : श्लोकसंख्या १९६ में 'क्षोणि' का 'क्षोणि', 'क्षोणि' तथा 'सार्धा' का 'सार्धं' 'साधा' 'सार्ध्व' पाठभेद मिलता है । पादटिप्पणियाँ : १९६ (१) विभीषण : आइने अकबरी ने नोयोबुन नाम तथा उसका राज्यकाल ३५ वर्ष ६ मास दिया है । गणन से राज्यारोहण का लौकिक वर्ष २०४८ आता है । वैबुद्दीन यहाँ एक दूसरे राजा इन्द्रायन को रखता है। उसे कैलाश सिंह का पुत्र बताता है । हसन कहता है- राजा वबोशन दोम रावन का बेटा था । क० २०१६ में तख्त शाही पर बैठा । चूंकि इल्म मौशीकी बखूबी सीखा था इसलिए हमेशा साजो सरोद और गाने बजाने में अपने औकात बसर करता था। तबियत मौजू पाई थी । इसलिए लोग इसे बहुत बड़ा शायर भी मानते हैं। ३६ वर्ष हकूमत में गुजारा । पृष्ठ ४५

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