भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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पृष्ठ 351

२५८ राजतरंगिणी सदाचारोऽपि स नृपः प्रजाभाग्यविपर्ययैः । व्यधाद्विषयदोषेण महानर्थपरंपराम् ॥ १६८ ॥ १६८. यद्यपि वह राजा सदाचारी था । परन्तु प्रजा के भाग्य¹ विपर्यय के कारण विषय दोष की बाधा लग गयी और महा अनर्थ करने लगा ।

१९७ (१) नर : आइने अकबरी ने नाम नरां दिया है। यह भी लिखा है कि उसे खर भी कहते हैं। राज्यकाल ३६ वर्ष ९ मास दिया है। अबुल फजल ने लिखा है कि इस राजा की मदद से ब्राह्मणों के अनुयायियो ने बौद्धों के विहारों को जला दिया । अन्य मुस्लिम लेखकों ने उसे नूज लिखा है। उनकी गणना से लौकिक वर्ष २०८३३ आता है। हसन लिखता है—'राजा नर क० २०५२ में बाप के कायम मुकाम होकर ताजशाही सर पर रखा । इन्साफ पसन्द और सखी था लेकिन अपनी रानी के साथ सख्त उलफत रखता था । रात-दिन उसी के पास बैठने में अपने औकात बसर करता। इसलिए रियाया की देख-भाल की उसे फुरसत नहीं थी । कैफियत—'मज़हब जैन का एक बड़ा आबिद व ज़ाहिद इन्सान मुकाम कागर में रहा करता था । जोग माया के जोर से उसने एक ऐसा तिलस्म और जादू किया हुआ था कि वह तो सबको देख सकता लेकिन उसे कोई न देख सकता । इस जादू के जोर से वह लोगों के घर में दाखिल हो जाता और उनकी औरतों और लड़कियों से ज़नाह किया करता । यहाँ तक कि राजा की रानी से मदारखलत करने लगा । राजा को जब इस बात का पता लगा तो उसके तनबदन में आग लग गयी। इस बिना पर उसने बौद्धों के सारे इबादतखानो और मन्दिरो के इन- हदाम का हुक्म दे दिया और उन में आग लगवा दी। उनका तमाम माल, दौलत, जागीर और गांव और मकानात बरहमनो को बख्श दिये । दरयाए झेलम के किनारे मुकाम चवदर मुत्तसिल बैजवारह एक शहर बनवाया और वहाँ अपने लिए एक आलीशान महल निहायत पुरूनगी और शानवाला तामीर कराया ।

कैफियत—'मोरखीन लिखते हैं कि इसके हकूमत में विशाक नाम का एक बरहमन था । शेशरम नाग की लड़की को अपने निकाह में लाये हुए था। राजा नर उस पर फेमफता हो गया । अपने साथ सुलाने और सुहबत करने के लिए राजा मजकूर ने बरहमन मजकूर पर जबर तशद्दुद किया । यह बात सुनकर शेशरम नाग गुस्सा मे भर गया और राजा के बनाए हुए शहर पर आग बरसाना शुरू कर दी। शहर और शहर वालों को थोड़ी ही देर में तबाह व बरबाद कर डाला। इसके बाद शेशरम नाग की बहन रमती ने गुस्सा से भरपूर हो कर बीस कोस तक शहर मजकूर पर पत्थरों की बारिश की जिसके वायस यह शहर ही दुनिया से मादोम हो गया । इसका मुफसल किस्सा शेशरम नाग के जिक्र में मजकूर है। राजा नर की मुद्दत हकूमत उनतालीस साल और नव महीना थी । पृष्ठ ४६ (२) किन्नर : दश देवयोनियों में एक योनि है। शरीर मनुष्य तथा मुख अश्व तुल्य होता है "स्यात्किं- नरः किम्पुरुषस्तुरंगवदनो मयुः ।" (१:२७) वैदिक साहित्य में मुझे किन्नर जाति का वर्णन किंवा उल्लेख नहीं मिला । सम्भव है यहाँ अश्व तुल्य का अर्थ मुख लम्बा समझा गया है। वायु तथा ब्रह्माण्ड पुराणों मे किन्नरों का उल्लेख आता है । यथा : गन्धर्वान् किन्नरान् यक्षान् रक्षोविद्याधरोरगान् । कलापग्रामकांश्चैव तथा किंपुरुषान् खगान् ॥ हिमालय पर्वतीय सीमावर्तीथ जाति का उल्लेख न होना विज्ञ पाठकों को चकित करेगा । इस पर गवेषणा की आवश्यकता है । १९८ (१) भाग्य विपर्यय : कल्हण यहाँ पर पुनः दुष्ट राजा होने अथवा राजा के दुष्ट हो जाने का दोष प्रजा पर मढ़ा है। प्रजा के भाग्य के कारण