राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रथम तरंग २६१ कः स्वभावगभीराणां लक्षयेद् बहिरापदम् । बालापत्येन भृत्येन यदि सा न प्रकाश्यते ॥ २३० ॥ २३०. स्वभावतः गम्भीर जनों की आपदाओं को बाहर कौन जान सकता है ? यदि बालक एवं भृत्य उसे प्रकाशित१ न करें । तदस्मिन्नेतयोर्बाल्याद्वस्तुनि व्यक्तिमागते । तवाग्रे गोपनं साधो न ममाऽप्युपपद्यते ॥ २३१ ॥ २३१. इन दोनों कन्याओं के बाल स्वभाव१ द्वारा वस्तु स्थिति प्रकट हो जाने पर साधो ! आपके सम्मुख अब कुछ गोपनीय रखना, मेरे लिये उचित नहीं है । त्वयाऽप्यस्मद्धितार्थाय निसर्गेसरलात्मनः । ईषत्प्रयासः कल्याणिन्क्रियतां यदि शक्यते ॥ २३२ ॥ २३२. कल्याणिन् ! स्वभावतः सरलात्मा आप भी हमारे हित हेतु यदि हो सके, तो थोड़ा प्रयास कीजिए । योऽयं तरुतले मुण्डश्चूड़ालो दृश्यते व्रती । अमुना सस्यपालेन कान्दिशीकाः कृता वयम् ॥ २३३ ॥ २३३. यह तरु तले, जो मुण्ड जटाधारी व्रती दिखाई पड़ रहा, इसी सस्यपाल ने हमें भयभीत कर रखा है । अभुक्ते मान्त्रिकैरन्ने नवे नागैर्न भुज्यते । अयं नात्ति च तत्तेन समयेन हता वयम् ॥ २३४ ॥ २३४. मान्त्रिकों१ के नवान्न ग्रहण करने के पूर्व नाग नया अन्न नहीं खाते । यह नवान्न नहीं खाता है। इसी नियम के कारण हमारी यह दुर्दशा है। २३० (१) प्रकाशित : कल्हण एक चतुर व्याव- पाठभेद : हारिक गृहस्थ की तरह घर की बात बाहर किस श्लोक संख्या २३२ में 'र्थाय' का 'दाने' तथा प्रकार फूटती है, उस पर प्रकाश डालता है । गम्भीर 'कल्याणिन्' का 'कल्याणि' पाठभेद मिलता है । मनुष्यों की बातें, जिसे वह किसी से कहता नही, श्लोक संख्या २३३ में 'मुण्डश्चूड़ालो' का 'मुण्ड तथापि घर के बालक तथा नौकरों के कारण बाहर चूड़ालो' तथा 'सस्य' का 'शस्य' पाठभेद मिलता है । फैल जाती हैं, किसी भी व्यक्ति के लिए यह असंभव पादटिप्पणियाँ : है। घर में अपनी बात बालक किंवा नौकरों से २३३ (१) मुण्ड : मुण्ड शब्द का अर्थ शर छिपाकर रख सके । दोनों ही अपनी मूढ़ता के कारण मुड़ा हुआ अथवा मुण्डित होता है । मुण्ड शुंभ का गुप्त से गुप्त बातें अनजाने बता देते हैं । एक सेनापति था। इसका अर्थ राहु और मुंडित २३१ (१) बाल स्वभाव : बालक का स्वभाव का अर्थ अधम भी होता है। तक्षक नाग ने यहाँ सरल होता है। वे बात प्रकट कर देते हैं। इस ओर मुण्ड शब्द उपेक्षा एवं घृणा सूचक अर्थ में व्यवहृत संकेत करता तक्षक नाग कन्याओं द्वारा बात प्रकट किया है । करने पर खेद प्रकट करता है ।