राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८२ राजतरंगिणी श्वशुरानुग्रहान्नागोभूत्स्यापि द्विजन्मनः । जामातृसर इत्यन्यत्तत्र च प्रथितं सरः ॥ २६८ ॥ २६८. श्वसुर के अनुग्रह से नाग हुए, द्विजन्मा का जामातृ सर¹ नामक वहां एक दूसरा प्रसिद्ध सरोवर है । लिंग का आकार भी घटता बढ़ता है । विश्व के वैज्ञानिकों के लिए यह एक विचित्र चमत्कार उप- स्थित करती है । श्रावण पूर्णमासी के दिन यह लिंग पूर्ण आकार में दृश्यगत होता है । वैज्ञानिकों का मत है । शीत के कारण, पानी चूने के कारण, गिरता जल जम कर लिंगाकार हो जाता है । अत एव लिंग की संज्ञा स्वयम्भू लिंग से दी गयी है । अमरनाथ माहात्म्य में यात्रा का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है । नीलमत पुराण तथा राजतरंगिणी काल में इस यात्रा का विशेष महत्व नही मालूम होता । बहुत कम उल्लेख आया है । जोनराज सुलतान जैनुल आवदीन अमरनाथ की यात्रा का वर्णन करता है । १२३३ जोन चरित्र अमरनाथ की यात्रा बड़ी रोचक होती है । मैने इस यात्रा का दृश्य देखा है । श्रीनगर से अमरनाथ की गुफा ९५ मील दूर पर स्थित है । श्रीनगर से पहलगांव ६० मील पर है । पहलगांव से श्रीनगर तक की सड़क बहुत अच्छी चौड़ी तथा आरामदेह है । बसें चलती हैं । साधारण यात्री बसों का उपयोग करते हैं । मार्ग का दृश्य अनूठा है । पहलगांव से ३५ मील का मार्ग मोटर कार तथा बस चलने लायक अब तक नहीं बन पाया है । जीप बहुत दूर तक जा सकती है । प्राय पहलगांव से हजारों यात्री पैदल, और टट्टू पर जाते हैं । धनी लोग जीप से भी जहाँ तक पहुँच सकती है, जाते हैं । इस समय यह यात्रा इतनी सुगम हो गयी है कि पहलगांव से एक दिन में वहां पहुँचा तथा लौटा जा सकता है । चन्दनबाड़ी पहलगांव से ८ मील दूर है । चन्दन- बाड़ी ९५०० फुट की ऊँचाई पर है । यहाँ की वनश्री देखते ही बनती है । चन्दनबाड़ी से शेषनाग ६ मील दूर है । पिस्सू घाटी तक की चढ़ाई सीधी ऊँचाई पर है । जानपल के समीप मार्ग एक छोटे मैदान से होकर गुजरता है । वहाँ पैदल यात्री अपना शिविर अर्थात् कैम्प लगा सकते हैं । यहाँ से ३ मील और चलने पर शेषनाग पहुँचा जाता है । शेषनाग १२२३० फुट ऊँचाई पर स्थित है । इस गिरि का दृश्य प्रेक्षणीय है। इसका जल हिम तुल्य शीतल है। इसमें स्नान करने से थकान तुरन्त मिट जाती है। बेबजन स्थान पर कैम्प लगाया जा सकता है। यहाँ लकड़ी की कमी है। जलाने का पहले से प्रबन्ध कर लेना चाहिए । यात्रा का तृतीय चरण शेषनाग से पंच तरणी तक है । दोनों के मध्य ८ मील की दूरी है । शेषनाग से सीधी चढ़ाई महागुण तक मिलती है। यह स्थान समुद्र की सतह से १४००० फुट की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ स्रोतस्विनियों का जल मिलता है। यहाँ से उतराई आरम्भ होती है । भैरव पर्वत के मूल में पाँच स्रोतस्विनियाँ मिलेंगी । उन्हें पार करना पड़ता है । उनका नाम पंच तरणी है । वहाँ यात्री एक रात पड़ाव कर सकते हैं । यात्रा का चतुर्थ चरण पंच तरणी से प्रारम्भ होता है । यहाँ से अमरनाथ की गुफा केवल ४ मील दूर रह जाती है । यह छोटा चढ़ाई का मार्ग है । पर्वत के बाहुमूल में घूमकर यात्री संगम स्थान पर पहुँचता है। यहाँ अमरावती नदी पंचतरणी में मिलती है । इस स्थान से गुफा का दृश्य मिलता है । २६८ (१) सर : अमरनाथ तीर्थ यात्रा मार्ग मे पर्वत शिखर पर एक सरोवर है । उसे शेषनाग सर कहते हैं । गाया है कि यह सर सुश्रवा निमित सरोवर है । यहाँ एक और सर है । उसे जामातुर नाग कहते हैं । कल्हण वर्णित जामातृ सर है ।