भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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२९० राजतरंगिणी उत्पलाक्ष इति ख्यातिं पेशलाक्षतया गतः । तत्सूनुस्त्रिंशतं सार्धां वर्षाणामन्वशान्महीम् ॥ २८६ ॥ उत्पलाक्षः ⸪ २८६. पेशलाक्ष होने के कारण प्रसिद्ध राजा सिद्ध के पुत्र उत्पलाक्ष¹ ने तीस वर्ष छः माह मही का शासन किया । तस्य सूनुर्हिरण्याक्षः स्वनामाङ्कं पुरं व्यधात् । क्ष्मां सप्तत्रिंशतं वर्षान्सप्तमासांश्च भुक्तवान् ॥ २८७ ॥ हिरण्याक्षः २८७. उसके पुत्र हिरण्याक्ष¹ ने अपने नाम पर नगर² बसाया और सैंतीस वर्ष सात माह पृथ्वी का भोग किया । विपरीत था । पिता जितना क्रूर, विषयी एवं लम्पट था , सिद्ध उतना ही अपने गुणो के कारण सिद्ध होकर, सदेह स्वर्ग प्राप्त किया था । (२) पटह : पटह का अर्थ ढोल, मृदंग, डुग्गी, नगाड़ा, डंका होता है । देवगण मृदंग तथा नगाड़ा बजाते थे । पटह झोप, डधोड्री तथा डुग्गी बजाने वालो का होता है । पटह भ्रमण का अर्थ जनता को एकत्रित करने के लिए घूमकर ढोल बजाने वालो का होता है । पाठभेद : श्लोक संख्या २८६ में 'पेशलाक्षतया' का पाठभेद 'पेशलाक्षितया' मिलता है । पादटिप्पणियाँ : २८६ (१) उत्पलाक्ष : यह एक मत है । पुष्क- राक्ष नामक कोई राजा कश्मीर में नही हुआ है । कल्हण की काल गणना अति त्रुटिपूर्ण इस समय की है । मुद्राराक्षस नाटक का काल भी अभी निश्चित नहीं हो सका है । विभिन्न विद्वानो के मतो में उसके रचना काल में शताब्दियो का अन्तर पड़ जाता है । पुष्कराक्ष को चन्द्रगुप्त कालीन राजा मान लिया जाय तो उसका समय अशोक, जलोक आदि सबके पूर्व पड़ जाता है । अर्थात् वह कल्हण के वर्णनानुसार लुप्त राजाओं की श्रेणी में आ जाता है । श्री एर० जो० पण्डित इस राजा का काल कल्हण की गणना के अनुसार ईसा पूर्व ८९५ वर्ष और श्री स्टीन उत्पलाक्ष का समय लौकिक संवत् २१८४ वर्ष तीन मास देते है । प्राप्य सामग्रियों के आधार पर अभी कुछ निश्चयपूर्वक नही कहा जा सकता । इस पर विशेष अनुसन्धान की आव- श्यकता है । यदि मुद्राराक्षस के ऐतिहासिक घटना को सत्य मान लिया जाय तो ऐतिहासिको के मत से चन्द्रगुप्त मौर्य का राज्य काल ईसा पूर्व होता है । मुद्राराक्षस का जो उद्धरण दिया जाता है। वह निम्नलिखित है : 'काश्मीरः पुष्कराक्षः क्षतरिपु, महिमा सैन्यवः सिन्धुषेणः' अंक ५ में पुनः उल्लेख प्रथम अंक श्लोक ११ के पश्चात् आता है : '—कुलूताधिपश्चित्रवर्मा मलयजनपदाधिपः सिंहनादः, कश्मीरदेशाधिपः पुष्कराक्षः, सिन्धुराजः सिन्धुषेनः, पारसिकाधिपतिर्मेघाक्षः अंक ५ में पुनः उल्लेख आता है : '—ये एतेन राक्षसेन सह सौहार्दमुत्पाद्यास्म- च्छरीरद्रोहेण चन्द्रगुप्तमाराधयितुकामाः राजानः तद्यथा कौलूतः चित्रवर्मा, मलयनरपतिसिंहनाद , काश्मीरपुष्कराक्षः सिन्धुराजमुषेणः— आइने अकबरी मे नाम 'अदुत बोल येह' तथा राज्यकाल ३० वर्ष ६ मास दिया गया है । हसन लिखता है—'राजा उत्पलाक्ष क० ५१५२ में वाप