भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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पृष्ठ 459

३४२ राजतरंगिणी सखोलखागिकाहाडिग्रामस्कन्दपुराभिधान् । शमाङ्गासमुखांश्चाग्रहारान् यः प्रत्यपादयत् ॥ ३४० ॥ जिसने खोल¹ सहित, खागिका², हाडा ग्राम³, स्कन्दपुर⁴, शमांगगादि⁵ मुख्य अग्रहारों को दिया था । इसकी यादगारों में से है। बेशुमार ग्राम बरहमनों और फकीरों को बख्श दिये और कई मन्दिर भी आबाद किये । जेष्ठेश्वर का मन्दिर जो 'काह गुले- मान' पर वाका है उसकी अजसरेनव तामीर व मरम्मत कराई । मौजा गोपकार और बछपारा बतौर लंगर इस 'बूतखाना' के लिये वक्फ कर दिये । अपनी कलमरो किसी को भी जानकर मारने की इजाजत नही देता था । साठ बरस ६ माह हुक्मरानो करके मर गया । पाठभेद : श्लोक संख्या ३४० में 'खोल' का 'खिला', 'हाडिग्राम' का 'हाडियामे' और 'शमाङ्गान' का 'शमाङ्गादि,' 'शमाजासा' तथा 'शमाजास' पाठभेद मिलता है । पादटिप्पणियाँ : ३४० (१) खोल : वर्तमान ग्राम खूली है। डलर परगना में है। खोल का अर्थ विकलाग तथा शिरस्त्राण होता है। खोलक का अर्थ ग्राम अथवा पुरवा होता है। (२) खागिका : वर्तमान खागी अर्थात् खाग ग्राम है। उल्लेख पृ० १२५ पर किया गया है। खागि, खागिक, खाग एक ही नामवाचक शब्द है। नीलमत में एक खाग नाग का उल्लेख आया है। स्वर्गः शिशिरवासी च आवासः श्रीधरः खगः । लाङ्गली बलभद्रश्च स्वरूपः पञ्चहस्तकः ॥ ९०५ : १०७१, १०७२ (३) हाडी ग्राम : वर्तमान आडग्राम है। आजकल इसे आरगोम गाव कहते है। नागाम परगना में है। इसका उल्लेख ( रा०त० ८.६७२, १५८६ तथा २१९६ ) कह्ण ने किया है। पं० काशीराम को सन् १८९१ में यहाँ कुछ मन्दिरों के भग्नावशेष मिले थे । इस समय यहाँ दो चार पत्थरों के और कुछ विशेष सामग्री मुझे नहीं मिल सकी । यह शब्द लौकिक तथा स्थानीय प्रचलित नाम मालूम होता है । (४) स्कन्दपुर : वर्तमान गांव खोंम्फर है। यह एक बड़ा गांव कुयर परगना में है। तेलवान तथा नौगाम के बीच मे पड़ता है। नीलमत पुराण में स्कन्दायतन, स्कन्देश्वर तथा स्कन्द तीर्थ का उल्लेख आया है। श्री स्टीन ने यहाँ की यात्रा सन् १८९१ ई० मे की थी। इसके विषय में उन्होंने कुछ लिखा नहीं है। मुझे इस स्थान पर कुछ विशेष सामग्री उल्लेखनीय नहीं मिली। इस समय अच्छा ग्राम है। कश्यप नील समागम तीर्थ वर्णन के प्रसंग में स्कन्द के निवास स्थान का उल्लेख मिलता है। सुवर्णबिन्दुस्तत्रैव हरस्यायतन शुभम् । स्कन्दस्यायतनं तत्र सर्वपापप्रिसूदनम् ॥ 112 : १५५ ॥ नीलमत में वितस्ता माहात्म्य के सम्बन्ध में स्कन्द तीर्थ का उल्लेख किया गया है। स्नात्वा तु मद्रतीर्थे च स्कन्दतीर्थे च मानवः । तथा सुरेश्वरीतीर्थे स्वर्गलोके महीयते ॥ 1388 : १५३२ ॥ नीलमत में देवायतन कीर्तन के प्रसंग में स्कन्देश्वर का वर्णन मिलता है। उनका स्थान मालि वन में माना गया है।