राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३६२ राजतरंगिणी
दण्डो ने अवन्तिवर्मा तथा अश्मकदेशाधिपति के सन्दर्भ में किया है। (८:५-३०) पाठभेद : श्लोक संख्या २७३ में 'शान्त्या' का 'कान्त्या' पाठभेद मिलता है। पादटिप्पणियाँ : ३७३. (१) भूमिपाल और अलकसुन्दर (सिकन्दर) : हसन लिखता है कि अन्धयुधिष्ठिर बाहर जाने पर बाहरी राजाओं द्वारा मार डाला गया था। यह नितान्त कपोलकल्पना है। कल्हण इसका ठीक उलटा वर्णन करता है। बाहरी राजाओं के सुव्यवहार के कारण वह अपने राज्य त्याग का दुःख भूल गया था। (२) राज्यपाल : कल्हण ने राजतरंगिणी में इस राजा का राज्यकाल नहीं दिया है। किन्तु उसने प्रथम तरंग के राजाओं के राज्यकाल का कुल योग गोनन्द (प्रथम) से युधिष्ठिर (प्रथम) तक २२६८ वर्ष दिया है। उसके अनुसार गणना करने पर युधिष्ठिर का राज्यकाल ३४ वर्ष ३ मास १ दिन आता है। आईने अकबरी ने राज्यकाल ४८ वर्ष १० दिन दिया है। यह काल गलत गणना के कारण त्रुटिपूर्ण है। पाठभेद के आधार पर गणना की जाय तो ३३ वर्ष ९ मास तथा ७ दिन आता है। गोनन्द तृतीय से युधिष्ठिर प्रथम तक २१ राजाओं का वर्णन कल्हण करता है। गोनन्द तृतीय का राज्याभिषेक लौकिक संवत् १८१४ में हुआ था। गोनन्द तृतीय से नरेन्द्रदित्य अर्थात् २० राजाओं का राज काल ९६७ वर्ष ८ मास तथा २३ दिन होता है। श्लोक संख्या ३४५ में ६ मास के स्थान पर ६ दिन की गणना करने से अवश्य अन्तर पड़ जाता है। वह होता है। ९६८ वर्ष २ मास २३ दिन। गोनन्द प्रथम का राज्याभिषेक लौकिक संवत् ६२८ में हुआ था। गोनन्द से लेकर अभिमन्यु तक के राजाओं का राज्य काल १२६६ वर्ष होता है। अर्थात् लौकिक संवत् ६२८ से १८९४ है। श्लोक संख्या ४८ में कल्हण लिखता है-'गोनन्द प्रथम तथा उसके उत्तराधिकारियों ने २२६८ वर्ष कलियुग में शासन किये। यह गणना कुछ लेखकों के मत से त्रुटिपूर्ण लगती है। उन्होंने माना है कि भारत युद्ध द्वापर के अन्त में हुआ था। श्लोक संख्या ५४ में कल्हण कुल ५२ राजाओं का राज्य काल १२६६ वर्ष देता है। इस प्रकार २२६८ में से यदि १२६६ वर्ष घटा दिया जाय तो केवल १००२ वर्ष बचता है। यह काल गोनन्द तृतीय से युधिष्ठिर तक का होता है। गोनन्द तृतीय से नरेन्द्रदित्य का शासन काल ९६७ वर्ष ८ मास २३ दिन होता है। यदि इस काल को १००२ वर्ष में से घटा दिया जाय तो युधिष्ठिर प्रथम का राज्यकाल ३४ वर्ष ३ मास १ दिन आता है। श्री एस. पी. पण्डित ने गोनन्द वंश के प्रथम तरंग के राजाओं के राज्यकाल की गणना १०१४ वर्ष ६ मास ९ दिन दी है। इसमे राजा युधिष्ठिर का राज्य काल न दिया गया है केवल लिख दिया गया कोई समय नहीं दिया गया है। गोनन्द तृतीय का राज्याभिषेक ईसापूर्व ११८४ वर्ष दिया गया है। युधिष्ठिर का राज्याभिषेक ईसा पूर्व २१७ वर्ष दिया है। युधिष्ठिर का राज्यकाल का समय न सम्मिलित करने पर इस गणना के अनुसार ९६७ वर्ष आता है। यदि प्रत्येक राजा का, शासन काल का समय गोनन्द तृतीय से नरेन्द्रदित्य अर्थात् युधिष्ठिर के राज्याभिषेक दिन तक का समय जोड़ा जाय तो ९६६ वर्ष १६ दिन होता है। गोनन्द वंश के प्रथम तरंग के राजाओं का जो जोड़ दिया गया है वह १०१४ वर्ष ९ माह ९ दिन दिया गया है। यदि १०१४ वर्ष ९ माह ९ दिन मे से ९६६ वर्ष १६ दिन निकाल दिया जाय तो ४८ वर्ष ८ मास २३ दिन बचता है। किन्तु श्री स्टीन की कल्हण आधारित गणना मानी जाय तो वास्तव में ३४ वर्ष ३ मास १ दिन आता है। श्री एस. पी. पण्डित के अनुसार ईसा पूर्व २१७ वर्ष में युधिष्ठिर सिंहासन पर बैठा था। श्री स्टीन के अनुसार यह दिन लौकिक संवत् २८६१ वर्ष ८ मास २९ दिन होना चाहिए।