राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंAn exact, line-by-line transcription of the Hindi and Sanskrit text shown in the image:
द्वितीय तरंग ४११ अथ भाव्यर्थमाहात्म्यात्प्रपथे प्रतिमन्दिरम् । राज्यं संधिमतेर्भावीत्यश्रुताऽपि सरस्वती ॥ ७२ ॥ ७२. भावी घटना के माहात्म्य से प्रत्येक घर में अश्रुत¹ भी वह वाणी फैल गयी— “राज सन्धिमति का होने वाला है।” नाचोदिता वाक्चरतीत्याप्तेभ्यः श्रुतवान्नृपः । ततः संभृतसंत्रासः कारावेश्मनि तं न्यधात् ॥ ७३ ॥ ७३. “बिना कही बात नहीं फैलती है।” इस प्रकार विश्वस्तों से राजा ने सुना और संत्रस्त होकर, उसे कारागार¹ में रख दिया। तत्र तस्योग्रनिगडैः पीडिताङ्घ्रेर्विशुष्यतः । पूर्णोऽभूद्दशमो वर्षो भूपतेश्चायुषोऽवधिः ॥ ७४ ॥ ७४. वहां उग्र निगड बन्धन से पीड़ित चरणयुक्त शुष्क उस मंत्री का दसवां वर्ष तथा राजा के आयु की अवधि पूर्ण हो गयी। निष्पुत्रः स महीपालो मुमूर्षुद्दाहमादधे । रोगोत्थया पीडया च चिन्तया च तदीयया ॥ ७५ ॥ ७५. निष्पुत्र एवं मुमूर्षु वह महीपाल रोगोत्पन्न पीड़ा और उस चिन्ता से दग्ध होने लगा। द्राम्यां' और 'हरसेवया' का पाठभेद 'हरिसेवया' मिलता है। पादटिप्पणियाँ : ७१ (१) हर एकादश रुद्रो में से एक है। यहाँ पर शिव के अर्थ में प्रयोग किया गया है। कम्बुज कम्बोडिया में हरि-हर की पूजा व्यापक रूप से प्रचलित थी। अर्धनारीश्वर के समान एक ही मूर्ति में दक्षिण ओर हरि तथा वाम अर्धांग में हर अर्थात् शिव की आकृति सवेशभूषा रहती थी। कम्बो- डिया के एंग कोरवाट में इस प्रकार की अनेक मूर्तियाँ मैंने अपने पर्यटन काल सन् १९५७ में देखी थी। पाठभेद : श्लोक संख्या ७२ में 'प्रतिम' का पाठ भेद 'नवम' मिलता है। पादटिप्पणियाँ : ७२ ( १ ) अश्रुत सरस्वती—इसका शाब्दिक अर्थ दो है। वह वाणी जो, सुनायी नही पड़ती। किवदन्ती या अफवाह के अर्थ में भी इस शब्द का प्रयोग किया गया है। पाठभेद : श्लोक संख्या ७३ में 'संभृत' का 'सद्भूत' तथा 'न्यधात्' का पाठभेद 'व्यधात्' मिलता है। पादटिप्पणियाँ : ७३(१) कारावेश्म—कारागार को उस समय कारावेश्म कहते थे। प्राचीन भारत में कारागार व्यवस्था बहुत विकसित हो चुकी थी। चाणक्य ने अर्थशास्त्र में कारागार का जो रूप प्रस्तुत किया है वह बहुत ही विकसित कहा जायगा। उसमें बन्दियों के भोजन, वस्त्र, बेड़ी, मुलाकात, जेल का शासन, जेल रक्षको अर्थात् वार्डरों का भ्रष्टाचार आदि पर आजकल के पटु कारागार विशेषज्ञ की तरह प्रकाश डाला गया है। पाठभेद : श्लोक संख्या ७५ में 'मादधे' का पाठभेद