भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

पृष्ठ 607, कुल 984 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 607

४५८ तृतीय तरंग

हुआ। और इन्तहाई अदल और इन्साफ़ के साथ कश्मीर के चमन को तर व ताज़गी बख्श दी। आस पास के मुमालिक को अपने क़ब्ज़ा इक़्तदार में ले आया। परिन्दों हैवानों के गोश्त के खाने वालो को नाहक़ खून बहाने की कत्तईयन मुमानियत कर दी। शिकारियो और कसाबों को गुज़र औकात के लिये जागीरें दी। उसकी हकूमत में किसी जानवर को तकलीफ़ नही पहुँची। बल्कि उसकी हुस्ननबीयत के पेश नज़र हशरात-भी आपस में एक दूसरे को एज़ार सानी पर क़ादिर न हुए। रात को भेष बदल कर शहर की गश्त किया करता था। फ़क़ीरों और बे वसीला लोगों को चोरी छिपे घर पर माल व दौलत भेजा करता। मंगावन, मनोया गाय और मेघमठ के दिहात आबाद किये। इसी असना में खबर सुनी कि हिन्दुस्तान में जानदारों को एज़ाज़ पहुँचाते हैं। चुनांचे ऐसा करने से रोकने के लिये एक बड़ी भारी फ़ौज इस तरफ रवाना की। हिन्दुस्तान के बहुत से राजों को अपना मतीय व फ़रमा वरदार बना लिया। जिसके नतीजे में उन्होंने जानदारों के इज़ाए तकलीफ़ की दस्तबरदारी अख्तियार कर ली। जिसने उसके हुक्म की तामील से सरताबी की उसकी हकूमत तबाह व बरबाद हो गयी। आहिस्ता आहिस्ता यह राजा फ़तह करते करते दरियाये शोर पर पहुँच गया।

एक दिन अपने अराकीने सल्तनत माय दरयाए शोर के अहूर करने पर मशविरा कर रहा था कि एकाएक दूर से यह आवाज़ सुनायी दी कि राजा मेघवाहन की अमलदारी में लोग मुझे मार रहे हैं। राजा इस फ़रियाद को सुनते ही ग़ैज़ व ग़ज़ब से भर गया। इस सदा की तलाश में दूर तक दौड़ कर गया। क्या देखता है कि एक आदमी है जिसे पाँच छः आदमी ज़ोर से जकड़ा हुआ ले जा रहे हैं। राजा ने हक़ीक़त हाल पूछा। उनमें से एक बोला कि हमारा एक प्यारा बेटा है। बीमारी के बायस क़रीबुल मर्ग है। इसके साथ हमारे पड़ोस में एक मन्दिर है। जहाँ से लोग ग़ैब की बातें सुनते हैं। वहाँ हमने अपनी बीमारी के मुताल्लिक सुना है कि इसके खातिर जब तक इन्सानी कुरबानी न दी जायगी तब तक वह अच्छा न होगा। अब यह अज़ल रशीदह हमारे पास पहुँचा है। इसको जान हम अपने लड़के के लिये कुरबान करेंगे।

राजा ने कहा मेरे अहद हकूमत में जब हैवानो का क़त्ल ममनू है। तो तुम्हारी क्या ताक़त है कि तुम बेगुनाह आदमी को क़त्ल करो। उन आदमियों ने जवाब दिया कि उस लड़के के वफ़ात से लोग बे जान होजायेंगे। जब आपको एक आदमी का मरना पसन्द नहीं है तो इतने आदमियों का मरना आपको किस तरह पसन्द होगा। और फिर ख़ुदा को आप क्या जवाब देंगे। राजा बोला कि यह मुसाफ़िर है। बे गुनाह है। इसको छोड़ दो। इसके बदले मेरी जान अपने बेटे पर कुरबान कर दो।

लोगों ने इसे मजाक समझा। लेकिन राजा ने अमलन तलवार निकाल कर अपने मार डालने का इकद्दाम किया। उसी वक्त राजा पर फूल आसमान से बरसने लगे। अचानक ग़ैब से एक रूहानी इन्सान नमूदार हुआ। और राजा का हाथ पकड़ कर उसे खुदकशी से रोका। उस वक्त तमाम लोग राजा की नज़रों से गायब हो गये। राजा हैरत के भँवर में फँस गया। और उस फ़िरिश्ता से इस जमायत की कैफ़ियत दरियाफ्त की। वह बोला कि यह जमायत ग़ैब से तेरी आज़माइश के लिये आयी थी। मैं समुद्रों और लहरों का मोकल हूँ। तेरा ख़ल्क खुदा पर तेरी शुजाअत और शफ़क़त देखकर मैं तेरा मुती व फ़रमा बरदार होता हूँ। और अब अपना मतलब मुझसे कह। राजा ने कहा। मैं तुझसे जज़ीरा सिंहल द्वीप और ज़ज़ीरा लंका की फ़तह में मदद माँगना चाहता हूँ। उस शख़्स ने जवाब दिया कि मैं ख़ुदा की बारगाह से तेरी मआनु-मत के लिये मुक़र्रर किया गया हूँ। इसके बाद मेघ गशलत बादशाह एक अज़ीमुशान फ़ौज के हमराह