भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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४६६ राजतरंगिणी अर्वाक्कालोद्भवस्यापि राज्यकालोऽस्य भूपतेः । न्यक्कतादिनृपोदन्तैर्वृत्तान्तैरद्भुतोऽभवत् ॥ १५ ॥ १५. अर्वाक् कालीन (परवर्ती) भी इस नृपति का राज्य काल आदि कालीन नृप कथाओं को तिरस्कृत करने वाले वृत्तान्तों के कारण अद्भुत हो गया था । स बहिर्विहरञ्जातु भृशमुद्वीतैरुदीरितम् । चौरश्चौरोऽयमित्यारादशृणोत्क्रन्दितध्वनिम् ॥ १६ ॥ १६. कदाचित् बाहर विहार करते हुए उस राजा ने समीप में "यह चोर है, यह चोर है" ऐसी भीतोक्त क्रन्दन ध्वनि सुनी। कः कोऽत्र बध्यतां चौर इत्युक्ते तेन सक्रुधा । शशामाक्रन्दितध्वानो न च चौरो व्यभाव्यत ॥ १७ ॥ १७. 'क कोऽत्र'-यहाँ कौन है ? चोर को बाँध लो' क्रोध पूर्वक राजा के कहने पर, आक्रन्दित ध्वनि शान्त हो गयी । किन्तु कोई चोर दिखायी नहीं दिया । है। खादन शब्द संस्कृत अवश्य है जिसका अर्थ खाना, भोजन करना, भोज्य पदार्थ तथा दाँत है। परन्तु यहाँ सम्मा के साथ प्रयुक्त होने पर ऐसी ध्वनि निकलती है जैसे दोनों शब्द मेघवाहन की अभारतीय रानियों के लिये प्रयुक्त किये गये हैं। समा शब्द अरबी है। उसका अर्थ आकाश होता है। सम्म अरबी शब्द है उसका अर्थ विष है। शमा और समा शब्द के अर्थों में भेद है। शमाका अर्थ मोमबत्ती । अरबी-फारसी में शमा उसे भी कहते हैं जिसका मुखमण्डल शमा के समान प्रकाशमान होता है। शम्मा अरबी शब्द है। उसका अर्थ हलका सुगन्ध होता है। मेघ- वाहन अफगानिस्तान के एक अंचल अर्थात् गन्धार में बाल्यावस्था व्यतीत किया था। वहीं से काश्मीर आया था। अतएव संभव है खादना तथा सम्मा उसकी रानियां अफगानिस्तान अथवा उसके पड़ोस ईरान, तुर्किस्तान या अफगानिस्तान में ही निवास करने वाली किसी अरबी अथवा ईरानी जाति की कन्या हों । अफगानिस्तान तथा तुर्किस्तान में उस समय बौद्ध धर्म का प्राबल्य था। दोनों रानियों का बौद्ध विहार बनवाना इस बात को प्रमाणित करता है कि वे बौद्ध धर्मानुरक्त थीं। मैं समझता हूँ कि दोनों रानियाँ तुर्किस्तान, अफगानि- स्तान किंवा ईरानी रक्त की थीं। १५ (१) राजतरंगिणी सूक्ति संग्रह का यह ५५ वा श्लोक है । पाठभेद : श्लोक संख्या १७ में 'सक्रुधा' का पाठभेद 'भूभुजा' मिलता है । पादटिप्पणियाँ : १७ (१) कः कोऽत्र : कोई है इस अर्थ में यह शब्द उस समय भी व्यवहृत होता था। अंग्रेजी में 'हू इज देय' इसी प्रकार का सम्बोधन है जो सेना तथा सशस्त्र पुलिस द्वारा किसी को जानने के लिये सम्बोधित किया जाता है।