भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

पृष्ठ 668, कुल 984 में से

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पृष्ठ 668

तृतीय तरंग ५०७ तानुज्ज्वलयितु भृत्यानन्विष्यन्नभ्यधात्ततः । यामिकेषु बहिः सञ्जः को वर्तत इति स्फुटम् ॥ १७३ ॥ १७३. तदनन्तर उन्हें प्रज्वलित करने के लिये भृत्यों को खोजते हुए सुस्पष्ट कहा— “बाहर यामिक¹ में कौन उपस्थित है ?” सुखसुप्तेषु सर्वेषु बाह्यकक्ष्यान्तरात्ततः । राजनयमहं मातृगुप्त इत्यशृणोद्वचः ॥ १७४ ॥ १७४. उस समय सभी लोग सुख पूर्वक सुप्त थे। बाह्य कक्ष में से—“राजन् ! मैं मातृगुप्त हूँ” यह वाणी ( राजा ने ) सुनी । प्रविशेति स्वयं राज्ञा दत्तानुज्ञस्ततो गृहम् । लक्ष्मीसांनिध्यरम्यं तददृष्टोऽन्यैर्विवेश सः ॥ १७५ ॥ १७५. राजा के स्वयं यह आज्ञा देने पर 'प्रवेश करो'— बिना दूसरे के ज्ञात हुये, गृह में प्रवेश किया । दीपानुज्ज्वलयेत्युक्तो निष्पाद्य चतुरः पदैः । बहिर्यायाशुरुचेऽथ क्षणं तिष्ठेति भूभुजा ॥ १७६ ॥ १७६. 'दीपों को जलाओं'— कहे जाने पर, निष्पादित करके ( दीप जलाकर ) चार पद बाहर जाने पर राजा ने उससे कहा, —'क्षण भर रुको' । स भयद्विगुणीभूतशीतकम्पः प्रभोः पुरः । किंस्विद्वक्तीति विमृशन्नातिदूरेऽभ्युपाविशत् ॥ १७७ ॥ १७७. भय से उस ( मातृगुप्त ) का शीत कम्पन द्विगुणित हो गया । 'वह क्या कहेंगे ।' विचार करते प्रभु के सम्मुख न अति दूर बैठ गया¹ । अथ पप्रच्छ भूपालः कियत्यस्ति निशेति तम् । सोऽभ्यधादेव यामिन्या यामः सार्धोऽवशिष्यते ॥ १७८ ॥ १७८. राजा ने उससे पूछा— 'कितनी रात्रि शेष है ?' उसने कहा— 'यामिनी का डेढ़ याम ( डेढ़ प्रहर ) अवशिष्ट है ।' १७३ ( १ ) यामिक : याम का अर्थ रात्रि 'र्ययो स ऊचेय', तथा 'यियासुरुच्चे च' मिलता है । तथा प्रहर दोनो होता है । रात्रि मे पहरा देने वालों श्लोक संख्या १७७ में 'भय' का पाठभेद 'मय' को यामिक कहा जाता है । मिलता है । पाठभेद : पादटिप्पणियाँ : श्लोक संख्या १७५ में 'दृष्टो' का पाठभेद १७७ ( १ ) बैठ गया : यहाँ पर कल्हण ने 'पृष्टो' मिलता है । 'उपाविशत्' शब्द का प्रयोग किया है । इसका अर्थ बैठना होता है । अन्य अनुवादकर्ताओं ने 'वह श्लोकसंख्या १७६ मे 'यियासुरुचेऽथ' का पाठभेद खड़ा हो गया' अर्थ किया है ।

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