भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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तृतीय तरंग ५१७

बिना परिश्रम धन प्राप्ति; अश्वारोहण—व्यापार में उन्नति; उद्यान लगाना—शुभसमाचार प्राप्ति, कोठे पर चढ़ना—शुभ समाचार; दर्पण देखना—प्रेमिका मिलन, बिस्तर बिछाना—धनप्राप्ति; पका बाल— दीर्घायु होना, अंडा देखना—पुत्र उत्पत्ति; पर्वता- रोहण—उन्नति; शरीर में विष्ठा पोतना—धनप्राप्ति; विष्ठा भक्षण—प्रचुर धन प्राप्ति; जल पीना—व्यापार मे लाभ; स्वादिष्ट भोजन एवं ताम्बूल खाना—सुन्दर स्त्री प्राप्ति; जल में डूबना—शुभ कर्म; कृपाण देखना— विजय प्राप्ति; हरीसाक तरकारी—शुभ समाचार; धनुष बाण चलाना—आशापूर्ति; सिंहासन पर चढ़ना— प्रतिष्ठा वृद्धि; रोना—प्रसन्नता प्राप्ति; श्वेत वस्त्र धारण—शुभसंवाद और क्रीडा देखने से प्रसन्नता की प्राप्ति होती है। पल्ली पतन या गिरगिट का अवरोहण— शुभ : सोम, बुध, गुरु, शुक्रवारो तथा १, २, ५, ६, १०, ११ तथा १२ तिथियों में पुष्य, अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, उ०फा०, पुनर्वसु, हस्त, स्वाती, अनुराधा, धनिष्ठा, शतभिष, रेवती, नक्षत्रों में पुरुष के दाहिने अंग तथा स्त्रियों के बायें अंग पर छिपकली का गिरना शुभ माना जाता है। सर पर गिरना—राज्य लाभ, ललाट पर—बन्धु दर्शन, भौंह पर—श्रेष्ठ पुरुषो से मित्रता; अधरोष्ठ पर—ऐश्वर्य प्राप्ति; दक्षिण कान पर—आयुवृद्धि; बायें कान—धन लाभ; ग्रीव—धन लाभ; दक्षिणबाहु- नृप तुल्यता; कण्ठ—शत्रुनाश, उदर—भूषण लाभ, घुटने पर शुभागमन, जंघों—शुभ, हाथो—वस्त्र लाभ, कन्धा पर—विजय; नासिका छिद्र—अत्यन्त धन लाभ कटिभाग —अश्व, हस्तो किंवा सवारी का लाभ ; हृदय—धनलाभ ; तथा मुख पर गिरना मिष्ठान्न भोजन की प्राप्ति होती है। छींक—शुभ : शयन, मल मूत्र त्याग, भोजन, स्नान-दान, विद्याध्ययन, युद्धप्रस्थान, विवाह, बीज बोने के समय शुभ होती है । पीछे तथा बायें की छींकमे दोष नही होता । छींक—अशुभ : साधारणतया किसी दिशा की छींक अच्छी नहीं कही गयी है । अपनी छींक स्वयं शुभप्रद नहीं होती । गाय-बैल की छींक अत्यन्त हानिकारक ; सम्मुख छींक—कलहकारिणी ; दाहिने की छींक—धननाशक ; धीरे की छींक— भय दायक ; कुमारी, वैश्या, मालिन, विधवा, धोबिन तथा रजस्वला की छींक—अशुभ ; तथा यात्रा के समय की छींक अशुभ होती है । स्वप्न—अशुभ : अर्धरात्रि के पूर्व का देखा स्वप्न शुभाशुभ फल नही देता । रात्रि के अन्त मे देखे स्वप्न का विचार करना चाहिए । उसके पश्चात् यदि निद्रा न आये तो शुभाशुभ का अवश्य फल होता है । आकाश से गिरना-शारीरिक एवं मानसिक कष्ट , पक्का फल भोजन—निकट सम्बन्धी की मृत्यु, ऊँट पर चढ़ना—अस्वस्थता ; घोड़े से गिरना— धन एवं प्रतिष्ठा की हानि ; नावपर चढ़कर डूबना—पदच्युति ; आधी तूफान —यात्रा में कष्ट ; पर्वत से गिरना—कष्ट, दाहिना बाहु का कटना— कोई भाई की मृत्यु ; बाईं भुजा का कटना ; छोटे भाई की मृत्यु ; बारात में जाना—मृत्यु ; नवीन घर निर्माण—सम्बन्धी की मृत्यु ; मुंडासिर-मृत्यु कारक ; तेल लगाना—स्वास्थ्यहानि ; स्वयं बीमार झंझट ; सूअर देखना—नाराजगी ; भैंस—आपत्ति आगमन ; शेर—राज भय ; राजा की मृत्यु-राष्ट्र पर विपत्ति ; पिंजडा देखना—कारागार मिलता है। पल्लीपतन—अशुभ : जन्म नक्षत्र, मृत्युयोग, दग्धयोग, भद्रा में, पापग्रह, पुण्यलग्न में चन्द्रमा अष्टम हो, तो छिपकली गिरने का फल अशुभ होता है । गिरगिट के अंग पर चढ़ने का फल छिपकली के सदृश ही. होता है । इसके अतिरिक्त, सर्प, जलहीन घट, बिल्ली आदि का यात्रा के समय सम्मुख पड़ना अशुभ तथा पूर्ण घट, शव, तिलकधारी ब्राह्मण, कोखमें बालक