भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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तृतीय तरंग ५६९ भवच्छेदाभिधं ग्रामं स्तुत्यं चैत्यादिसिद्धिभिः । यो व्यधात् सोऽस्य वज्रेन्द्रोऽप्यासीन्मन्त्री जयेन्द्रजः ॥ ३८१ ॥ ३८१. जिसने चैत्य आदि सिद्धियों ( निर्माण ) से भवच्छेद' नामक ग्राम स्तुत्य बनाया वह जयेन्द्र का पुत्र वज्रेन्द्र भी इसका मंत्री था । ही एक जलस्रोत था । यह स्रोत मार नहर में तारबल के समीप जाकर मिलता था । किसी ने इस जलस्रोत को चलते हुए नहीं देखा था । श्री स्टीन को श्री साहिबराम के पुत्र पं० रामचन्द्र ऋषी से जिनकी अवस्था ६० वर्ष की थी मालूम हुआ कि उनकी बाल्यावस्था में उनके एक अति वृद्ध सम्बन्धी गोवर्धनदास याजिद यहाँ नित्य पूजा करने आते थे । यहाँ पर शहतूत का एक पेड़ लगा था । यहाँ के गवर्नर शेख मुहीउद्दीन की आज्ञा से सन् १८४२-१८४५ के बीच काट डाला गया था । वृक्ष के कटने पर वृक्ष के तना से रक्त की धारा निकली थी । श्री गोवर्धन दास वहाँ पर प्रवण के दिन दीपक जलाने आते थे । जियारत के मुल्ला के अनुरोध पर गवर्नर ने वृक्ष कटवाया था क्योंकि हिन्दू यहाँ पूजा करने आते थे । नीलमत पुराण में स्कन्दतीर्थ, स्कन्दस्यायतन तथा स्कन्देश्वर का उल्लेख मिलता है । स्कन्दपूजा : रुद्रं चन्द्रसुमां स्कन्दं नासत्यौ नन्दिनं तथा । पूजयित्वार्चमाल्यादिनैवेद्यैश्च पृथक् पृथक् ॥ 381 : ४८८ × × × शाखो विशाखः स्कन्दश्च नैगमेषस्तथैव च । मरुतश्च ग्रहश्चैव रोगाणामधिपो ज्वरः ॥ 604:७२६ × × × स्कन्दस्य तत्र कर्तव्या पूजा माल्यैः सुगन्धिभिः । 647 : ७६९ शच्याः समीपे पौलस्त्य दृष्ट्वा स्कन्दं नराधिप । पात्रकुण्डे नरः स्नात्वा कौमारं लोकमाप्नुयात् ॥ 995 : ११६६ × × × स्कन्देश्वर . स्कन्देश्वरं विशाखेशं पौलास्त्यमपरं तथा । दृष्ट्वा कुमारमेकैक फलं गोदानजं लभेत् ॥ 991 : ११६८ × × × स्कन्दतीर्थ : स्नात्वा तु मदतीर्थे च स्कन्दतीर्थे च मानवः । तथा सुरेश्वरी तीर्थे स्वर्गलोके महीयते ॥ 318 : १५३२ ॥ × × × स्कन्दस्यायतनम् : सुवर्णबिन्दुस्तत्रैव हरस्यायतनं शुभम् । स्कन्दस्यायतनं तत्र सर्वपापनिषूदनम् ॥ 112 : १५४-१५५ पाठभेद : श्लोकसंख्या ३८१ में 'भवच्छेदा' का पाठभेद 'भीछो' मिलता है । पादटिप्पणियाँ : ३८१ ( १ ) भवच्छेदः यह ग्राम ऊलर परगना में है । यह वर्तमान वुत ग्राम है। इसे 'बोस्मो' भी कहते है । मीर संगम से एक मील दक्षिण स्थित है । नीलमत में भवच्छेद वर्णन नहीं मिलता । भव, भवोत्स, भवेश का उल्लेख मिलता है । भवच्छेद ग्राम का भव से कोई सम्बन्ध है या नहीं गवेषणा का विषय है । भव कश्मीर के मुख्य नागो में से है : ७२