भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

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परिशिष्ट ख ८३ जाती थी । पुष्करावती सिन्धु के पश्चिम तथा तक्षशिला के पूर्व ओर आबाद थी । अभिधर्म कोष शास्त्र - एवं सुमंगल विलासिनी का रचयिता बसुबन्धु पुष्करावती का निवासी था । गान्धार जातक में गान्धार कश्मीर का उल्लेख मिलता है । दरायुह के बेहिस्तुन अभिलेख ( ईसा पूर्व पाँच सो बाईस से चार सो छियासी वर्ष ) गान्धार का उल्लेख है। दरायुह ( दारियस ) के सूसा प्रासाद के भग्नावशेष के एक अभिलेख में गान्धार का उल्लेख मिला है । जम्बूद्वीप की सीमा वर्णन में उत्तर-पश्चिम गान्धार तथा कश्मीर का उल्लेख किया गया है । सोलह जनपदों में कम्बोज तथा गान्धार को उत्तरापथ में सम्मिलित किया गया है । खुद्दक निकाय के उत्तरखण्ड चुल्ल निद्देस में गान्धार जनपद के स्थान पर भोन अर्थात् भवन जनपद का उल्लेख किया गया है । मज्झिम निकाय की अट्ठ कथा तथा पपंचसूदनी में गान्धार राष्ट्र सीमान्त पर स्थित जनपद बताया गया है । यहाँ पर कश्मीर गान्धार का नाम साथ-साथ लिया गया है । ( जातक भाग २ : ३६५ ) । अनेक विद्वानों ने इसके आधार पर कश्मीर को गान्धार के अन्तर्गत बताया है । यह अप्रमाणित है । ठीक नहीं है । मार्कण्डेय, वायु, ब्रह्माण्ड, मत्स्य तथा वामन पुराणों में 'गान्धारा यवनाश्चैव' का उल्लेख मिलता है । गान्धार, यवन शब्द एक साथ प्रयुक्त किया गया । उनसे यवन देश तथा गान्धार का समीप होना प्रतीत होता है । सिन्धु अर्थात् आधुनिक सिन्ध प्रदेश सिन्धु नदी के पश्चिम तथा पूर्व में सिन्धु नदी के अधोभाग के पूर्व था । सोवीर क्षेत्र झेलम-चनाव संगम से ५० मील अधोभाग में था । भद्र देश वर्तमान सियालकोट तथा उसका समीपवर्ती क्षेत्र है । कुणिन्द लोगों के विषय में कहा जाता है कि कुलू अंचल के आधुनिक कुलेतस हैं । प्राचीन काल में यह अंचल सहारनपुर तथा अम्बाला जिले तक विस्तृत था । इस क्षेत्र से तत्कालीन मुद्राएँ प्राप्त हुई हैं । पारद लोग खुराशान क्षेत्र के निवासी थे । यवन अफगानिस्तान में थे । यूनानी जाति अफगानिस्तान में आबाद हो गयी थी । राज्य वही स्थापित कर लिया था । कुहून शब्द काबुल नदी जिसका प्राचीन नाम कुभा किंवा कुहू था उसकी उपत्यका के निवासियो के लिए आया है। 'गान्धारान् वरयान् हुन्दान्,' 'गान्धारान् ओरसान् कुहून्,' 'गान्धारान् रुरसान् (ओरसान्) कुहून्' आदि उल्लेख वायु, ब्रह्माण्ड तथा मार्कण्डेय पुराणों में मिलते हैं । इससे निष्कर्ष निकलता है । गान्धार कुभा अर्थात् काबुल नदी की उपत्यका तक विस्तृत था । 'शिवपौरान् इन्द्रहार्यान्', 'शिवपौरान् इन्द्रभरून्' का उल्लेख वायु, ब्रह्माण्ड तथा मत्स्य पुराणों में मिलता है । शिव पौरान् से अर्थ शिव नगर के पौरगण से है । शिवपुर अर्थात् वर्तमान शोरकोट जिला पश्चिमी पाकिस्तान के लिए व्यवहृत किया गया है । संम्मोह तन्त्र की तालिका ( २ : ४ ) में गान्धार देश का उल्लेख किया गया है । 'हूण कौरव गान्धार' अर्थात् हूणों के समीप देश की ओर संकेत किया गया है । गान्धार का दूसरा नाम दिहन्दास दिया गया है । दोनों शब्द समानार्थक माने गये हैं । दिहन्दास वास्तव में उदभाण्डपुर प्रतीत होता है । गान्धार को कन्धार में मिलाने का प्रयास किया गया है परन्तु यह खींचातानी तर्कसम्मत नहीं मालूम होती । गान्धार की जो स्थिति तथा सीमा बतायी गयी है उसमे वर्तमान कन्धार का मेल नहीं खाता । सम्भव है । गान्धार के नाम पर अफगानिस्तान के दक्षिण में गान्धार नगर बसाया गया होगा ! हो सकता है गान्धार का अपभ्रंश वर्तमान कन्धार हो गया । भारत में काशी नाम के कितने ही स्थान हैं । परन्तु वाराणसी को ही काशी वास्तविक काशी राज्य रही । अन्यथा, दक्षिण काशी, उत्तर काशी अनेक स्थान काशी के नाम पर है ।