राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिशिष्ट 'त' कर्णाट ( तरंग : १ : ३०० : पृष्ठ ३१२ ) कर्णाट किंवा कर्णाटक का उल्लेख सुदूर प्राचीन काल से पुराणाधीन ग्रन्थों में उल्लिखित होता आया है। यह भारतवर्ष का एक सुनिश्चित भू-खण्ड था। यहाँ की भाषा अलग थी। आजकल के कन्नड भाषा-भाषी इस भूखण्ड के निवासी हैं। स्वतन्त्रता के पश्चात् कन्नड भाषा-भाषियों की एक इकाई मैसूर राज्य के रूप में बन गयी है। महाभारत भीष्म पर्व (९.५९) में कर्णाटक को एक जनपद की संज्ञा दी गई है। कर्णाटक का उल्लेख द्रविड, केरल, प्राच्य, मूषिक, वनवासिक, महिषक, विकल्प, मूषक, तिल्लिर, कुन्तल, मोहुद, नभ कानन, कौकुट्टक, चोलादि के साथ प्राय किया गया है। भागवत पुराण (५.६.७) में कर्णाटक का उल्लेख किया गया है। यहाँ उसे बड़ा मण्डल कहा गया है। स्कन्द पुराण में देशों की तालिका में कर्णाट का स्थान ८४ तथा ग्राम संख्या १२५०० दी गयी है। बृहद् संहिता में गोनर्द, केरल के साथ कर्णाट का उल्लेख किया गया है। उक्त उदाहरणों से स्पष्ट प्रतीत होता है। कर्णाटक का नाम कल्हण ने ठीक कर्णाट दिया है। कर्नाट किंवा कर्णाटक प्राचीन मूल नाम नहीं हैं। कन्नड भी प्राचीन मूल नाम नहीं है। यह सब कर्णाट के अपभ्रंश किंवा उसके बिगड़े रूप हैं। कर्णाटक देश वासियों की भाषा कन्नड है। उसका साहित्य कन्नड साहित्य कहा जाता है। वर्तमान मैसूर राज्य कन्नड भाषियों का राज्य है। कन्नड शब्द निःसन्देह कर्णाट का अपभ्रंश है। सम्मोह तन्त्र की रचना सन् १४५० ई० के पूर्व हुई थी। उसमें सौराष्ट्र, द्रविड, सैंधव, मलय विदर्भ तथा मालवा आदि के साथ की गयी है (४)। शक्ति संगम तन्त्र (३ : ७ : १) में महाराष्ट्र के साथ कर्णाटक का उल्लेख किया गया। आज भी कर्णाटक अर्थात् कन्नड भाषी मैसूर महाराष्ट्र की पूर्वी तथा दक्षिणी सीमा पर स्थित है। इसी ग्रन्थ में कर्णाटक की सीमा दी गयी है। शक्ति संगम तन्त्र के पूर्व में बैजनाथ, उत्तर में अमरकंटक और दक्षिण में कांचीपुरम के मध्य में कर्णाटक देश था। इसका विस्तार रामनाथ से आरम्भ होकर श्रीरंग तक दिया गया है। (३ : ८ : १६) उक्त तन्त्र ग्रन्थों के अनुसार प्राचीन कर्णाटक प्रदेश रामनाथ से श्रीरंग तक विस्तृत था। श्रीरंग वर्तमान श्रीरंगपत्तत के लिये व्यवहृत किया गया है। रामनाथ स्थान रामनाथपुरम् अर्थात् पूर्व रामनद जिला अथवा रामनाथ मठ मदुरा जिला अथवा तुंग और भद्रा नदियों के संगम पर रामेश्वर तीर्थ हो सकता है। प्राचीनकाल में यह राज्य पाण्ड्य तथा चोल राज्यों में विभाजित था। पाण्ड्य राज्य मदुरा तथा तिन्ने वली अंचल तक विस्तृत था। चोल राज्य कारोमण्डल तट पर पदुकोट्टायो तक विस्तृत था। चौथी शताब्दी में यहाँ पल्लवों का राज्य स्थापित हुआ था। उनकी राजधानी कांची थी। यह आठवीं शताब्दी