भारतकोश
राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

पृष्ठ 926, कुल 984 में से

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पृष्ठ 926

परिशिष्ट 'थ' लाट ( तरंग १:३००: पृष्ठ ३१३ ) महाभारत अनुशासन पर्व ( ३५:१७-१८ ) में वर्णन आता है । लाट क्षत्रिय जाति थी । परन्तु ब्राह्मणों के साथ ईर्ष्या करने के कारण नीच हो गयी थी । संमोह तन्त्र में ( २:३ ) देशों की तालिका में लाट देश का नाम चोल, कर्णाटक आदि के साथ दिया गया है । इसी प्रकार शक्ति संगम तन्त्र ( ३:७:५५ ) में लाट देश को सीमा दी गई है । उससे निश्चय किया जा सकता है कि लाट देश प्राचीन काल में कहां तक विस्तृत था । लाट देश उक्त उद्धरण के आधार पर अवन्तो के पश्चिम तथा विदर्भ ( वरार ) के उत्तर-पश्चिम ठहरता है । लाट देश माही तथा ताप्ती के मध्य में पश्चिमी क्षेत्र में था । राजाओं की शक्ति एवं राज्य विस्तार के कारण यह सीमा कभी-कभी माहो के ओर परे तक जातो थी । उसमे भृगुकच्छ ( भड़ौच ) तथा नवसारिका ( नवसारी ) के अंचल सम्मिलित हो जाते थे । वात्स्यायन कामसूत्र ( ६ ५.२६ ) तृतीय शताब्दी की रचना के अनुसार लाट देश की स्थिति मालवा के पश्चिम दिशा में बतायी गयी है । विनयचन्द्र की काव्य शिक्षा में लाट देश के ग्रामों की संख्या २१ हजार तथा गुर्जर देश की ७० हजार दी गयी है । स्कन्द पुराण में देशों की तालिका में लाड किंवा लाट देश की क्रमसंख्या ३८ तथा उसके ग्रामों की संख्या भी २१ हजार दी गयी है । उसमे कच्छ की ग्राम-संख्या १४ हजार, सौराष्ट्र की ५५ हजार तथा गुजरात की ग्रामसंख्या ७० हजार दी गयी है । इससे स्पष्ट है कि लाट देश का अस्तित्व प्राचीन काल में गुजरात, सौराष्ट्र, कच्छ से स्वतन्त्र तथा भिन्न था । लाट प्रदेश गुजरात तथा सौराष्ट्र से छोटा और कच्छ से बड़ा था । लाट तथा लाटविषय का उल्लेख प्रथम शताब्दी से सातवी तथा आठवीं शताब्दी तक भारतीय वाङ्मय में मिलता है । इस प्रदेश का नाम पुराण तथा महाभारत और रामायण में नहीं मिल सका है । प्लोस्मी ने इसका उल्लेख किया है । उसके अनुसार लारिक भारतीय समुद्र तट पर था । वह मोफी ( माहो ) नदी के मुहाने पर था । माही अन्तरीप का नर्मदा तथा माही के मध्य कहीं होना लिखता है । कालान्तर में लाट देश का प्राकृत रूप लार देश हो गया था । इसमें गुजरात तथा उत्तरीय कोंकन का अंचल आ जाता था । मुगल काल में लार समुद्र भाषा और मसूदी लारो का उल्लेख मिलता है । लाट देश के अन्तर्गत वरयगजा ( भड़ौच भृकच्छ ) तथा ओजेन ( उज्जैन ) नगर थे । गोसारिद भी उसमें सम्मिलित था । वह नोसारिका किंवा वर्तमान नोसारी है । लाट प्रदेश को अष्टाश इक्कीस तथा वारस अर्थात् ताप्ती और माही नदियों के मध्य कतिपय विद्वानों ने माना है । वह सम्भावना प्रकट की गयी है कि आदित्य वर्धन के पुत्र प्रभाकर वर्धन के संघर्ष में देवगुप्त ने यथेष्ट सहायता राजा डांकरगण के अन्य अधीनस्थ राजाओं से ली थी जिनमें निरिहुल तथा गुर्जर थे । उनके मध्य उस समय लाट देश विभाजित हो गया था । लाट देश के कुछ सैनिक मालवा के पक्ष

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