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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

पृष्ठ 100, कुल 534 में से

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• महारावत सूरजमल ५७ दोनों तरफ़ के बहुत से वीर मारे गये और ज़फ़रखां हारकर मालवे को लौट गया । इस युद्ध के प्रसंग में महाराणा रायमल के समय की एकलिङ्गजी के दक्षिण-द्वार की वि० सं० १५४५ (चैत्रादि १५४६ = ई० स० १४८६) की प्रशस्ति में लिखा है कि मेदपाट के अधिपति रायमल ने मंडल दुर्ग (मांडलगढ़) के पास सैन्य का नाशकर शकपति ग़यास (ग़यासुद्दीन, मालवे का सुलतान) के गर्वोन्नत सिर को नीचा कर दिया १ । वहां से रायमल मालवे की ओर बढ़ा और खैराबाद के युद्ध में यवन सेना को तलवार के घाट उतारकर उसने और सारंगदेव के पहले के अपराध क्षमा कर दिये । सूरजमल और सारंगदेव वंशक्रम के अनुसार परस्पर चाचा-भतीजे थे। इससे संभव है कि कर्नल टॉड ने सूरजमल—जो महाराणा का चचाज़ाद भाई था—और सारंगदेव को—जो उस (महाराणा) का चाचा होता था—परस्पर चाचा-भतीजे होने से महाराणा का भतीजा समझ लिया हो तो कोई आश्चर्य नहीं है । टॉड के उपर्युक्त संदिग्ध लेख को समझने में प्रतापगढ़ राज्य के गैज़ेटियर-लेखक के० डी० अर्सकिन को भी भ्रम हो गया और उसने प्रतापगढ़ राज्य के संस्थापक सूरजमल के विषय में कर्नल टॉड का सूरजमल को पितृहंता उदयसिंह का पुत्र मानना लिखकर उसका खंडन किया (राजपूताना गेज़ैटियर; जि० २ ए, पृ० १६७) । अर्सकिन के संदेह को ठीक मानकर विलियम क्रुक ने भी अपने संपादित 'एनाल्स एंड एंटिक्विटीज़ ऑफ़ राजस्थान' (जि० १, पृ० ३४७ टिप्पण ४) में उसके कथन को उद्धृत कर दिया । टॉड के उपर्युक्त विस्तृत ग्रंथ का अध्ययन करने पर अर्सकिन का यह लेख कि टॉड ने सूरजमल को पितृघाती उदयसिंह का पुत्र लिखा है, ग़लत प्रमाणित होता है । इसी प्रकार क्रुक का टिप्पण भी, क्योंकि टॉड ने प्रतापगढ़ राज्य के संस्थापक सूरजमल को कहीं पितृहंता उदयसिंह का पुत्र नहीं लिखा है तथा पृथ्वीराज और सूरजमल के पारस्परिक कलह के अवसर पर पृथ्वीराज का सूरजमल को 'काका' एवं सूरजमल का पृथ्वीराज को 'भतीजे' शब्द से संबोधन करना लिखकर सूरजमल के मेवाड़ छोड़कर कांठल में जाने और उसके वंशधरों के प्रतापगढ़ का स्वामी होने का उल्लेख किया है। इससे महाराणा का भाई (क्षेमकरण का पुत्र) सूरजमल और पितृहंता उदयसिंह का पुत्र सूरजमल भिन्न व्यक्ति प्रकट होते हैं। (१) वीरविनोद; पहला भाग, पृ० ३३८ । मेरा उदयपुर राज्य का इतिहास; जि० १, पृ० ३२६ । ८