भारतकोश
राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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५६ •प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास

किया, जिसमें सुलतान की हार हुई१। सुलतान ने इस हार का बदला लेने के लिए पुनः युद्ध की तैयारी की और अपने सेनापति ज़फ़रखां को एक बड़ी सेना के साथ मेवाड़ पर भेजा। ज़फ़रखां इस सेना के साथ मेवाड़ के पूर्वी हिस्से को लूटने लगा, जिसकी सूचना पाते ही महाराणा अपने कुंवरों पृथ्विीराज, जयमल, संग्रामसिंह, पत्ता (प्रताप) और रामसिंह तथा कांधल चूंड़ावत, सारंगदेव अज्जावत आदि कितने ही बड़े-बड़े सरदारों एवं विशाल सेना के साथ मांडलगढ़ की तरफ़ बढ़ा। वहां घमासान युद्ध हुआ, जिसमें


(१) वीरविनोद; भाग १, पृ० ३३८। मेरा उदयपुर राज्य का इतिहास; जिल्द १, पृ० ३२८ । कर्नल टॉड का कथन है कि उदयसिंह दिल्ली के सुलतान के पास चला गया और वहीं बिजली गिरने से मरा (राजस्थान; जि० १, पृ० ३४०)। नैणसी लिखता है कि मेवाड़ का राज्य छूटने के पीछे उदयसिंह सोजत गया और उसने कुंवर बाघा की बेटी से विवाह किया। फिर वह बीकानेर चला गया और वहीं मरा (मुंहणोत नैणसी की ख्यात; जि० १, पृ० ३६)। मेवाड़ राज्य की ख्यातों से पाया जाता है कि वह मालवे के सुलतान के पास गया था और वहीं उसकी मृत्यु हुई। अनन्तर उसके पुत्र सूरजमल और सहसमल सुलतान ग़यासुद्दीन को मेवाड़ पर चढ़ा लाये (मेरा उदयपुर राज्य का इतिहास; जि० १, पृ० ३२७। ख्यातों के इस कथन की पुष्टि एकलिङ्गजी के दक्षिण-द्वार की प्रशस्ति से भी होती है। उसमें सूरजमल और सहसमल के दिल्ली की सेना को मेवाड़ पर चढ़ा लाने का कुछ भी उल्लेख नहीं है। कर्नल टॉड भी ग़यासुद्दीन की मेवाड़ पर चढ़ाइयां होने का वर्णन करता है, पर उसका कथन है कि उनमें महाराणा की जो विजय हुई, वह उसके भतीजों की वीरता पर ही निर्भर है, जिनको महाराणा ने क्षमा कर दिया था (राजस्थान; जि० १, पृ० ३४०)। किन्तु अन्य स्थल पर महाराणा का अपने भतीजों (सूरजमल और सहसमल—पितृघाती उदयसिंह के पुत्र) को क्षमा करने का उल्लेख नहीं मिलता है। टॉड का यह कथन कि पितृहंता उदयसिंह के पुत्रों (सूरजमल और सहसमल) ने, जिनको महाराणा रायमल ने क्षमा कर दिया था, मालवे के सुलतान ग़यासुद्दीन की मेवाड़ की चढ़ाइयों के समय वीरता प्रदर्शित की थी, ठीक नहीं जान पड़ता। यहां टॉड का अभिप्राय सूरजमल और सारंगदेव से हो तो युक्तिसंगत जान पड़ता है, क्योंकि अन्य साधनों से सूरजमल और सारंगदेव का, ग़यासुद्दीन की मेवाड़ की चढ़ाई के समय महाराणा के पक्ष में लड़ना पाया जाता है। भीतरी वैमनस्य होने पर भी महाराणा रायमल ने सूरजमल का सादड़ी पर अधिकार रहने दिया एवं सारंगदेव को भैंसरोड़गढ़ का इलाक़ा प्रदान कर दिया। इसका तात्पर्य यही हो सकता है कि महाराणा ने सूरजमल