भारतकोश
राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

पृष्ठ 108, कुल 534 में से

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पृष्ठ 108

महारावत सूरजमल ६५ पृथ्वीराज के ७ घाव लगे १ । सूरजमल भी बुरी तरह घायल हुआ। उसके राजपूत उसे डोली में डालकर पहाड़ों में ले गये २ । पृथ्वीराज ने उनका पीछा किया । सूरजमल के राजपूत बन्ना देवड़ा के हाथ से पृथ्वीराज का सरदार महिया भाखरोत मारा गया ३ । 'हरिभूषण महाकाव्य' में लिखा है- "एक दिन चित्तौड़ के स्वामी महाराणा रायमल ने, जो बड़ा पराक्रमी और प्रतांपी था, क्रोधित होकर कहा कि जब तक सूरजमल जीवित है, तब तक मुझे कुछ अच्छा नहीं लगता। क्या उसे मारने का बीड़ा उठाने के लिए कोई वीर तैयार है ? इसपर कुंवर पृथ्वीराज ने बीड़ा उठाया ४ । फिर उसने सेना के साथ प्रस्थान किया (१) वीरविनोद; द्वितीय भाग, पृ० ३४८ । मेरा उदयपुर राज्य का इतिहास; जि० १, पृ० ३३७ । (२) मुंहणोत नैणसी की ख्यात; प्रथम भाग, पृ० ६४ । (३) वही; प्रथम भाग, पृ० ६४ । (४) एकदा चित्रकूटेशो रायमल्लोऽतिवीर्यवान् । सिंहासनसमारूढो वीरालंकृतसंसदि ॥ १८ ॥ इत्यूचे वचनं क्रुद्धो रायमल्लः प्रतापवान् । मदाज्ञांवीटिकां वीरः कोऽपि गृह्णातु सत्वरम् ॥ १६ ॥ उत्थाय च ततो भूपैरनेकैर्नमितं शिरः । वद नाथ ! महावीर दुर्विनेयोऽस्ति कोऽपि चेत् ॥ २० ॥ अवोचदिति विज्ञप्तः सूर्यमल्लो महाबलः । व्यथयत्येव मर्माणि श्रुत एव न संशयः ॥ २१ ॥...... : न राज्यं रोचते मह्यं न पुत्रा न च बांधवाः । न स्त्रियोऽप्यसवो यावत्तस्मिन्जीवति भूपतौ ॥ २३ ॥ वीरैः कैश्चिद्वचस्तस्य श्रुतमप्यश्रुतं कृतम् । अन्यैरन्यप्रसंगेन पैरैरपरदर्शनात् ॥ २४ ॥......