राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
पृष्ठ 112, कुल 534 में से
संदर्भ में पढ़ेंमहारावत सूरजमल ६६ दूसरे दिन प्रातःकाल होते ही सूरजमल, जो पृथ्वीराज के स्वभाव से परिचित था, वहां से रवाना होकर सादड़ी की ओर चला गया और पृथ्वीराज ने सारंगदेव को देवी के दर्शन के बहाने अपने साथ मन्दिर में ले जाकर दर्शन करते समय मार डाला। फिर वह वहां से रवाना होकर सूरजमल के पास सादड़ी पहुंचा। उसने वहीं भोजन करना चाहा। सूरजमल की स्त्री ने भोजन तैयार करवाकर सामने रखा। भोजन के समय सूरजमल भी उसके शामिल बैठ गया। यह देख सूरजमल की स्त्री चौंक उठी और उसने शीघ्रतापूर्वक उस थाल में से एक कटोरे को उठा लिया, जिसमें विष मिला हुआ था। पृथ्वीराज ने सूरजमल से पूछा कि इस कटोरे को क्यों उठाया तो सूरजमल ने उत्तर दिया कि इसमें विष मिला होगा। राजपूतों में विश्वासघात बड़ा भारी पाप माना जाता है, अतएव अपनी स्त्री के इस जघन्य कृत्य से सूरजमल को बड़ा दुःख हुआ और उसने पृथ्वीराज से कहा—"मैं तुम्हारा काका हूं, इसलिए रक्त-संबंध से अपने भतीजे की मृत्यु को नहीं देख सकता, किंतु तुम्हारी काकी को तुम्हारी मृत्यु उसे लज्जित करते हुए कहा—इस समय का घूंसा पहले के घावों की अपेक्षा कहीं अच्छा है। इस पर सूरजमल ने कहा कि वह मेरे भतीजे के हाथ का हो। सूरजमल ने कुंवर से युद्ध बन्द करने की प्रार्थना कर कहा कि यदि मैं मारा जाऊं तो कुछ नहीं, मेरे पुत्र राजपूत हैं, वे देश में दौड़ेंगे और उनको सहारा मिल जायगा; किन्तु यदि, कुंवर, तुम मारे गये तो चित्तौड़ का क्या हाल होगा? मेरा मुंह काला होगा और सदैव के लिए मेरा नाम कलंकित हो जायगा। इसपर तलवारें म्यान में कर दी गईं और चाचा-भतीजे कंधे से कंधा मिलाकर मिले। पृथ्वीराज ने पूछा—काकाजी ! जब मैं आया उस समय आप क्या कर रहे थे? सूरजमल ने उत्तर दिया कि भोजन करने के पीछे मामूली बातें कर रहे थे। पृथ्वीराज ने कहा कि मेरे जैसा दुश्मन आपके सिर पर लगा हुआ होने पर भी आप इस प्रकार ग़ाफ़िल कैसे रहते हैं ? सूरजमल ने कहा—क्या करें, तुमने मेरे लिए कोई साधन न रखा और मुझे अपना मस्तक टिकाने को कोई जगह चाहिये (टॉड; राजस्थान; जि० १, पृ० ३४६-७)।