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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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महारावत विक्रमसिंह जाता है। यही संवत् बड़वे की ख्यात में भी दिया है। अनुमानतः आसकरण और विक्रमसिंह के बीच यह युद्ध वि० सं० १६२० ( ई० स० १५६३ ) के पूर्व किसी समय हुआ होगा । ख्यातों में विक्रमसिंह के देहांत के विषय में मत-भेद है । कोई उसका देहांत वि० सं० १६३३ ( ई० स० १५७६ ) में और कोई वि० सं० १६३५ विक्रमसिंह का देहांत ( ई० स० १५७८ ) में होना बतलाती है, परंतु दोनों कथन विश्वसनीय नहीं है; क्योंकि उसके उत्तराधिकारी तेजसिंह के वि० सं० १६२१ भाद्रपद सुदि ११ ( ई० स० १५६४ ता० १८ अगस्त ) के ताम्रपत्र में पुरोहित दामा को सूर्य-ग्रहण' के अवसर पर दामाखेड़ी गांव दान देने का उल्लेख है, जिससे उसका देहा- वसान वि० सं० १६२० ( ई० स० १५६३ ) के लगभग होना संभव है । भरामण परोत दामा जोग्य अत् थने श्रीक्रस्नार्पण सुरज परव महे गाम दमाखेड़ी नीम सीम सुंदा जीमाहे जमीन वीगा ११०० अग्योरेसे या चंद्रार्क यावत उदक अघाट कर सारी लागत वलगत टंकी टुसी सहीत नीरदोस करे आपी जणीरी मारा वंसरो थई ने चोलण करेगा नहीं । चोलण करे जणी ने चीतोड़ भागा नु पाप छे । स्वदत्तां परदत्तां वा यो हरते वसुंधरां (ष)ष्टी वर्स(र्ष) सह(सह)त्राणी(स्राणि) विष्ठाया(यां) जाञ(य)ते कृमी(मि) दुवे श्रीमख......समत १६२१ रा वर्से भादवा सुदि ११ दीने श्ररिस्तु ॥ मूल ताम्रपत्र की छाप से । ( १ ) उपर्युक्त ताम्रपत्र में दामाखेड़ी गांव सूर्यग्रहण पर पुरोहित दामा को दान करने का उल्लेख है । ग्रहणों का मिलान करने पर वि० सं० १६२१ आषाढ वदि ३० ( ई० स० १५६४ ता० ८ जून ) गुरुवार को सूर्यग्रहण होना पाया जाता है। जैसा कि प्रायः देखा जाता है, ग्रहण के अवसर पर दान का संकल्प तो कर दिया जाता है, परन्तु यथावकाश सनद पीछे से करादी जाती है। संभव है इस ताम्रपत्र में भी ऐसा ही हुआ हो।