राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
DevanagariHindipublished534 पृष्ठ
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महारावत विक्रमसिंह १०३ जिसका सूत्रपात सूरजमल के समय में ही हो चुका था। वह समय के अनुसार आचरण करता था। मालवे के मुसलमान हाकिमों के साथ उसने मित्रता का व्यवहार रखा, जिससे उसको अपना राज्य स्थिर करने में कुछ बाधा नहीं हुई। बांसवाड़ा राज्य पर डूंगरपुर के स्वामी आसकरण ने अधिकार किया, उस समय उसने आसकरण से विरोध कर बांसवाड़ा पुनः प्रतापसिंह को दिलाया। वह स्वभाव का उदार और विनम्र था। ख्यातों में लिखा है कि उसने वगवा गांव वसाया और रायासपुर में प्राकार बनवाया। वगवा गांव में उसने छत्री, तालाव, बावड़ी और बाग बनवाये।