राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३६ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास 'वीरविनोद'१, 'मालकम की रिपोर्ट'२, एवं 'प्रतापगढ़ राज्य के गैज़ेटियरों'३, आदि में महारावत जसवंतसिंह का उदयपुर में महाराणा जगतसिंह की सेना से लड़कर मारे जाने का उल्लेख है, जिसका समर्थन नैणसी की ख्यात से भी होता है४, जो उपर्युक्त पुस्तकों में अधिक प्राचीन और महारावत हरिसिंह के समय की संगृहीत है। इनके अतिरिक्त 'अमरकाव्य'५ और 'राजप्रशस्ति महाकाव्य'६ में भी उसके महाराणा राजसिंह से लड़कर मारे (१) वीरविनोद; द्वितीय भाग, पृ० ३१८-६ और १०६० । (२) सर जॉन मालकम; रिपोर्ट ऑन दि प्रॉविन्स ऑव् मालवा एंड एड्ज्वान्- निंग डिस्ट्रिक्ट्स; पृ० २२४ । (३) कैप्टन सी० ई० येट; गैज़ेटियर ऑव् प्रतापगढ़; पृ० ७६ । मेजर के० डी० अर्सकिन; गैज़ेटियर ऑव् प्रतापगढ़; पृ० १६८ । (४) प्रथम भाग, पृ० ६६ । (५) पूर्णे षोडशके शते च उदिते पंचाग्रकाशीतिके राणोक्त्योत्कटरामसिंह इति यो राठोडचूडामणिः । प्रोद्दंडं जसवंतरावतपरं कुंतैर्जघान द्रुतं वीरं देवलियाप(तिं) किल महासिंहाख्यपुत्रान्वितं ॥ तदनुदेवलियानगरस्य वा समररंगनटैश्च महाभटैः ॥ रचितमेव विखंडनमंजसा जनगणैश्च विलुंटनमुत्कटैः ॥ स रामसिंहो जसवंतसंज्ञं तं रावतं पुत्रयुतं निहत्य । चक्रे जगत्सिंहनृपस्य तोषं संतोषपोषं समवाप तस्मात् ॥ अमर काव्य । (६) जगत्सिंहाज्ञया यातो राठोडोरामसिंहकः । प्रतिदेवलियां सेनायुक्तो रावतमुद्भटं ॥ २० ॥ जसवन्तं मानसिंहपुत्रयुक्तं जघान सः । पुर्यां देवलियायां च लुंटनं रचितं जनैः ॥ २१ ॥ सर्ग पांचवां । राजप्रशस्ति महाकाव्य में कुंवर मानसिंह के महारावत जसवन्तसिंह के साथ