राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४६ 'प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास (ई० स० १६४४) में वह पुनः शाही दरबार में गया और आगरे रहते समय वि० सं० १७०१ चैत्र सुदि ५ (ई० स० १६४४ ता० ३ मार्च) को उसने ठीकरा गांव दुवे जगन्नाथ और इंदर को प्रदान किया था¹ । प्रतापगढ़ राज्य के पुराने संग्रह में महारावत हरिसिंह के समय के बने हुए कई चित्र हैं, जिनमें एक वादशाह शाहजहां और उस(हरिसिंह)का [महारावत को शाही दरबार] चित्र है। उस चित्र के पीछे उसी समय की लिखी [से ख़िलअत आदि मिलना] हुई यह इबारत है कि वि० सं० १७०५ (ई० स० १६४८) में वादशाह शाहजहां ने उसे ख़िलअत, हाथी, घोड़ा, नालंकी, सरपेच, हीरे की पहुंचियां, मोतियों की कंठी, आमली, कलंगी आदि प्रदान कीं²। इसी वर्ष उक्त महारावत की किसी कार्य के विषय में वादशाह की सेवा में अर्ज़ी पेश होने पर उसके उत्तर में सन् जुलूस २२ ता० २ सफ़र हि० स० १०५६ (वि० सं० १७०५ फाल्गुन सुदि ४=ई० स० १६४६ ता० ५ फ़रवरी) को शाहज़ादे दाराशिकोह ने वादशाह की आज्ञानुसार महारावत के नाम निम्न लिखित आशय का निशान भेजा—"उसकी दर्खास्त, जो वाद- शाह की सेवा में भेजी गई, अवलोकन हो गई है और हमने उस(हरिसिंह)- की सहायतार्थ गैरतख़ां को लिख दिया है, जो उचित कार्यवाही करेगा। उसको चाहिये कि वह उत्साह के साथ सेवा करता रहे³।" (१) महाराज श्री रावत श्रीहरीसंघजी बचनातु आगे दुवे जग- नाथ दुवे इदर( इंद्र )जी जोग थांने गांव १ मोजे ठीकरो मया करे त्रा( तां )वापत्रे आचंद्रारक ( चंद्रार्क ) दी दो वेठ बराड़ माफ आगरा मांहे दी दो दुए श्रीमुख हजूर संवत् १७०१ चेत सुदि ५ । मूल तांबापत्र की छाप से । (२) वादशाह शाहजहां और महारावत हरिसिंह के उपर्युक्त चित्र के लेख से । इस चित्र में वादशाह शाहजहां तख्त पर बैठा हुआ है और सामने महारावत हरिसिंह खड़ा है । (३) शाहज़ादे दाराशिकोह के निशान के अंग्रेज़ी अनुवाद से उपर्युक्त सारांश