राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचार वर्ष पीछे महारावत की उत्तम सेवाओं के विषय में शाही अफ़सरों की तरफ़ से सिफारिशें पेश हुईं, जिससे प्रसन्न होकर सन् जुलूस २६ ता० १४ रमजान हि० स० १०६२ (वि० सं० १७०६ श्रावण सुदि १५= ई० स० १६५२ ता० ६ अगस्त) को बादशाह की तरफ़ से उसके नाम शाही सरदार मुहम्मद तुरां और मुहम्मद मुराद द्वारा यह आज्ञा पहुंची कि उसकी असीम स्वामी-भक्ति की भावनाओं से प्रेरित होकर यह आज्ञा दी जाती है कि वह तत्काल इस दरबार में उपस्थित हो¹। इसपर महारावत शाही दरबार में गया और कई महीनों तक बादशाह शाहजहां की सेवा में रहा। बादशाह ने उसकी सेवाओं से प्रसन्न होकर मंदसोर इलाक़े का चालीस हज़ार दाम आय का कोटड़ी परगना दीवानी और माली स्वत्वों के साथ जो जानबाज़खां² की जागीर में था, उस (महारावत हरिसिंह) को प्रदान करने का सन् जुलूस २६ ता० २० रवि-उल्-अव्वल हि० १०६३ (वि० सं० १७०६ फाल्गुन बदि ७ = ई० स० १६५३ ता० ६ फ़रवरी) को फ़रमान जारी कर दिया³। उद्धृत किया गया है। असली निशान फ़ारसी भाषा में है और उसपर 'अबूल्कादिर मुहम्मद दाराशिकोह बिन शाहजहां बादशाह गाज़ी' की छाप है। (१) मूल फ़ारसी पत्र के अंग्रेज़ी अनुवाद से उद्धृत। (२) जानबाज़खां, बादशाह शाहजहां के समय डेढ़ हज़ार ज़ात और एक हज़ार सवार का मंसबदार था। संभव है कि यह मालवे की तरफ का कोई मुसलमान हाकिम हो और उसके मरजाने या उसकी जागीर ज़ब्त हो जाने पर बादशाह की तरफ़ से कोटड़ी का परगना महारावत को प्रदान किया गया हो। (३) बादशाह शाहजहां के मूल फ़रमान का अंग्रेज़ी अनुवाद। यह फ़रमान उस समय की प्रचलित राज भाषा फ़ारसी में है और उसपर बादशाह शाहजहां की बड़ी गोल मुद्रा लगी हुई है, जिसमें जहांगीर से लगाकर अमीर तैमूर तक के बादशाह शाहजहां के सब ही पूर्वजों के नाम अंकित हैं। मुग़ल बादशाहों के समय में जो जागीरें और तनख्वाहें मंसब के एवज़ में दी जाती थीं, उनकी आय का विवरण दामों में लिखा जाता था और चालीस दाम का एक रुपया माना जाता था एवं जागीर के दीवानी और माली स्वत्व ही मिलना फ़रमानों में लिखा जाता था। शाहजहां के दरबार में महारावत हरिसिंह की पहुंच थी और बादशाह की तरफ से फ़रमान तथा शाहज़ादों की तरफ़ से उसको निशान लिखे जाने से स्पष्ट है कि वह साम्राज्य का विश्वासपात्र सेवक था।