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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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१४८ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास वि० सं० १७१० ( ई०।स० १६५३ ) में बादशाह ने शाइस्ताखां के स्थान पर शाहज़ादे मुरादबख्श को गुजरात का सूबेदार नियत किया । तब उक्त शाहज़ादे ने महारावत के नाम सन् जुलूस महारावत की शाहज़ादे २७ ता० २३ सफर हि० १०६४ ( वि० सं० १७१० मुराद के साथ नियुक्ति माघ वदि १० = ई० स० १६५४ ता० ३ जनवरी) को निम्नलिखित आशय का निशान भेजा—हमारे प्रस्थान का दिन सन्निकट होने के कारण तुम्हें रुख़सत नहीं दी जा सकी है, इसलिए तुम जहां हो वहीं ठहरे रहो । यह जानकर तुम्हें प्रसन्नता होनी चाहिये कि तुम्हारी सेवाओं और राजभक्ति का उचित पुरस्कार दिया जायगा¹ । फिर जब शाहज़ादा मुरादबख्श अहमदाबाद की तरफ़ रवाना हुआ तो सन् जुलूस २७ ता० ६ जमादि-उल् अव्वल हि० १०६४ (वि० सं० १७११ चैत्र सुदि १२ = ई० स० १६५४ ता० १६ मार्च) को महारावत को सूचना दी कि हम ता० २२ रवि उस्सानी (वि० सं० १७१० चैत्र वदि ६ = ता० २ मार्च) को बादशाह की ख़िदमत से रुख़सत हासिल करके शान और शौकत के साथ खाती चांदे (चांदा घाटी) के मार्ग से उज्जैन जा रहे हैं । कुछ दिन वहां ठहरकर अहमदाबाद जायंगे । तुम्हारी बहादुरी, अच्छे काम एवं बहुत से आदमियों के एकत्रित करने का वृत्तांत हमने बादशाह की सेवा में अच्छी तरह प्रकट कर दिया है । ईश्वर ने चाहा तो अच्छा परिणाम निकलेगा । इस समय तुम्हें गुजरात पर मुक़र्रर करके अपने साथ लिये जाते हैं । आवश्यकता इस बात की है कि जो कुछ गुजरात के सम्बन्ध में बादशाह से निवेदन किया गया है, उसको दिखलाकर वह अपनी मित्रता और शुभ- चिंतकी बतलावे एवं खाती चांदे (चांदा घाटी) की तरफ़ आकर हमारी सेवा में हाज़िर हों² । इसपर महारावत शाहज़ादे के पास उपस्थित हो गया । तदनन्तर शाहज़ादे ने उसके नाम सन् जुलूस २८ ता० १५ जमादि उस्सानी (ज्येष्ठ ( १ ) शाहज़ादे मुरादबख्श के फ़ारसी निशान का अंग्रेज़ी अनुवाद । ( २ ) शाहज़ादे मुरादबख्श के फ़ारसी निशान का अंग्रेज़ी अनुवाद ।