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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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१६६ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास पद्मकुंवरी नाम दिये हैं। इसी प्रकार उसमें महारावत हरिसिंह की गौड़ राणी धर्मकुंवरी (विट्ठलदास की पुत्री) से कुंवर प्रतापसिंह का जन्म होना लिखा है। इसके विपरीत महारावत प्रतापसिंह (हरिसिंह का पुत्र) के वि० सं० १७३३ माघ सुदि १५ (ई० स० १६७७ ता० ७ फ़रवरी) के पाटल्या गांव के मेहता जयदेव के नाम के संस्कृत दानपत्र¹ एवं 'प्रताप-प्रशस्ति'² (खंडित काव्य) में उस (प्रतापसिंह) की माता का नाम मनभावती दिया है, जो अधिक विश्वसनीय है। पाटल्या गांव के दानपत्र और 'प्रताप- प्रशस्ति' में उस (मनभावती, प्रतापसिंह की माता) के पितृकुल का परिचय नहीं दिया है, जिससे इस विषय पर अधिक प्रकाश नहीं डाला जा सकता। ख्यातों में प्रतापगढ़ राज्य के पहले के राजाओं की राणियों और उनके पितृकुल का परिचय परस्पर नहीं मिलता। इसी प्रकार महारावत हरिसिंह की राणियों और उनके पितृकुल, संतति आदि के नाम भी परस्पर नहीं मिलते हैं। वंश-भास्कर से ज्ञात होता है कि उस- (हरिसिंह) के भातुलदेवी नामक कुंवरी भी थी, जिसका विवाह बूंदी के स्वामी राव भावसिंह हाड़ा से हुआ था³, पर ख्यातों में भातुलदेवी का नाम (१)······तेन महाराजेनैकदा गङ्गालक्ष्मीसमानस्वमातृमहाराज्ञी- श्रीमन्भावतीजीभासमानायां···········। मूल ताम्रपत्र की प्रतिलिपि से। (२) माताश्रीमन्भावतीविरचितं दिव्यैर्जलैः पूरितं मेघैर्मानसरः पवित्रजनतासेव्यं मनोहारि तत्। यत्राम्राः परितः फलन्ति हि सदा पुण्यप्रभावादिवो दिव्यं मानसरो विहाय नितरामायान्ति देवानिशम्॥ (३) दूजी हरि की सुता प्रतापगढ़ सीसोदनी भातुलादि देवी नाम व्याह्यो अधिके उछाह···॥ १२॥ पृ० २७२५।