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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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१७४ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास

हेमाद्रिप्रयोग-मूल-ग्रंथ प्रसिद्ध विद्वान् हेमाद्रि ने बनाया था। प्रतापगढ़ के पंडित जगन्नाथ शास्त्री की भेजी हुई महारावत हरिसिंह के समय की निर्मित पुस्तकों की सूची में 'हेमाद्रिप्रयोग' का नाम होकर उसके आरंभ का श्लोक दिया है, जिससे ज्ञात होता है कि उपर्युक्त पंडित जयदेव ने महारावत हरिसिंह के समय हेमाद्रि के मूल ग्रंथ के आधार पर उसे परिवर्तित कर संक्षिप्त रूप में बनाया हो¹। हृदयप्रकाश-हृदयेश-रचित यह संगीत का ग्रंथ अधिकतर नष्ट हो गया है, जिससे इसका रचना-काल और ग्रंथकर्त्ता का विशेष परिचय ज्ञात नहीं हो सका, परंतु इसके कुछ पन्ने मिल गये हैं, जिनसे इसका महारावत हरिसिंह के समय बनना पाया जाता है²। गोपालार्चनचंद्रिका-संभवतः यह विष्णुपूजा संबंधी ग्रंथ हो। इसके रचयिता ने अपना नाम न देकर अपने को कृष्ण मिश्र का पुत्र बत- लाया है। इसकी रचना का समय शक संवत् १५८३ (विक्रम संवत् १७१८) श्रावण वदि ४ (ई० स० १६६१ ता० ५ जुलाई) दिया है और महारावत हरिसिंह की आज्ञा से इसकी रचना होने का उल्लेख किया है³।

(१) जयदेवेन रचितः प्रयोगः पापनाशनः । भूभुजा हरिसिंहेन कृतः श्रीकृष्णवासरे । (२) संगीतशास्त्रसर्वस्वमसाधारणगोचरः । वीणादौ रागमेलादिर्हृदयेशेन कथ्यते ॥ इति श्रीममहाराजाधिराज-महाराजश्रीदेवदुर्गाधीशश्रीहरिसिंहविजयराज्ये श्रीहृदयनारायणदेवविरचितो हृदयप्रकाशः । (३) शाकेवह्निगजार्चि( र्थि )भूमिसहिते पक्षे च शुक्लेतरे मासेश्रावणसंज्ञिके शशि( ? )दिने श्रीमच्चतुर्थ्यातिथौ । आदेशान्नृहरेर्नृपस्य कृतिनामानन्दसंदायिनीं गोपालार्चनचन्द्रिकां रचितवान् कंसारिमिश्रात्मजः ॥