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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

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२०० प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास कज्जन (मंदसोर का हाकिम) के नाम नीचे लिखा आज्ञापत्र प्रेषित किया--- "वसाड़ परगने की ४१२५८०० दाम की जागीर प्रतापसिंह के पुत्र पृथ्वीसिंह को दी गई है। अतएव तुम्हें (मीर कज्जन को) लिखा जाता है कि उधर के ज़मींदारों को आज्ञा दो कि सब बक़ाया ठीक-ठीक चुका दें¹।" जहांदारशाह एक वर्ष भी राज्य न करने पाया था कि उस (जहां- दारशाह) को उसके छोटे भाई अज़ीमुश्शान (शाहआलम बहादुरशाह [पार्श्व-टिप्पणी: महारावत के नाम बादशाह. फ़र्रुख़सियर का फ़रमान] का छोटा पुत्र) के शाहज़ादे फ़र्रुख़सियर ने हराकर मुग़ल साम्राज्य पर अधिकार कर लिया।.. इस अवसर पर महारावत पृथ्वीसिंह ने बादशाह के नाम अर्ज़ी भेजी। उसके उत्तर में वादशाह ने फ़रमान भेज महारावत को लिखा कि तुम्हारी भेजी हुई अर्ज़ी, जो मित्रता का विश्वास दिलाने के लिए लिखी गई है, हमारे समीप रहनेवालों के द्वारा हमारी नज़र से गुज़री। हमारा असीम अनुग्रह अपने ऊपर समझकर अर्जियां भेजते रहो²।" इसके पीछे महारावत पृथ्वीसिंह के नाम सन् जुलूस २ ता० ८ रबी- उल्अव्वल हि० स० ११२६ (वि० सं० १७७१ चैत्र सुदि १० = ई० स० १७१४ ता० १४ मार्च) को वादशाह की ओर से उसके पास नीचे लिखा फ़रमान पहुंचा-- "अपने बराबरवालों में चुने हुए रावत राव पृथ्वीसिंह को बादशाही कृपा का उम्मेदवार रहकर ज्ञात हो कि इस शुभ और अच्छे समय में परमेश्वर की कृपा से हमको बड़ी विजय प्राप्त हुई है। इसलिए इस अच्छे समय में राजा बहादुर (किशनगढ़ का राजा राजसिंह³ ) के ( १) वादशाह जहांदारशाह के फ़ारसी फ़रमान का अनुवाद । ( २ ) वादशाह फर्रुख़सियर के फ़ारसी फ़रमान का अनुवाद । ( ३) राजा राजसिंह, किशनगढ़ के राजा मानसिंह का पुत्र और रूपसिंह का पौत्र था। वि० सं० १७६३ (ई० स० १७०६) में मानसिंह का देहांत हो जाने