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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

पृष्ठ 253, कुल 534 में से

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२०२ 'प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास

कारण नरयाना (? नौलाना) का ज़मींदार शिवसिंह¹, देवलिया का पृथ्वी- सिंह² तथा रामपुरा का खुशहालसिंह (कुशलसिंह) और वदनसिंह³, शाही परगनों में लूट-मार मचा रहे हैं। वहां का फ़ौजदार मुहम्मदखां पृथक् किये जाने के कारण उनको रोकने में विशेष कार्य नहीं कर रहा है। यदि नया फ़ौजदार मुहम्मदज़मां वहां शीघ्र भेज दिया जाय तो अच्छा हो। इस- पर बादशाह ने लतीफुल्लाखां को आज्ञा दी कि वह फ़ौजदार को शीघ्र जाने को कहे⁴। बादशाहत की कमज़ोर हालत और अपने पर बादशाह की नाराज़गी देखकर महारावत पृथ्वीसिंह को अपना राज्य बचाने की चिंता हो गई।

(१) इंदौर राज्य के देपालपुर ज़िले में नर्मदा के किनारे नौलाना नाम का चौहानों का छोटा ठिकाना है। संभव है उपर्युक्त नरयाना इसी नौलाना का सूचक हो और उस समय शिवसिंह वहां का सरदार रहा हो। (२) महारावत पृथ्वीसिंह को इसके पूर्व ही बादशाह फ़र्रुख़सियर ने 'रावत- राव' की उपाधि दे दी थी, जैसा कि ऊपर बतलाया जा चुका है। फिर उसके विद्रोहा- चरण कर शाही इलाक़े में लूट-मार मचाने की बात समझ में नहीं आती, क्योंकि इसका कोई कारण देखने में नहीं आया। अनुमान होता है कि महाराजा सवाई जय- सिंह के मालवे में पहुंचने पर वहां उस (महारावत) का उपर्युक्त महाराजा से मेल नहीं रहा, जिसपर महाराजा द्वारा बादशाह के पास शिकायत होने से महारावत के सम्मान में कमी हुई हो, तब महारावत ने लूट-मार करना आरंभ किया हो। (३) खुशहालसिंह (कुशलसिंह) रामपुरा के चंद्रावत (सीसोदिया) राव गोपालसिंह का कुटुंबी और वदनसिंह उस (गोपालसिंह) का पौत्र था। जहांदारशाह के समय वदनसिंह का पिता रत्नसिंह (जिसका बादशाह औरंगज़ेब के समय मुसलमान हो जाने से इस्लामख़ां नाम हुआ) मालवे के सूबेदार अमानतख़ां से लड़कर मारा गया। तब गोपालसिंह ने, जो औरंगज़ेब के समय से ही रामपूरे की गद्दी से वंचित हो गया था, पीछा रामपूरे पर अधिकार करना चाहा, परंतु शाही दरबार से रुकावट हुई, जिससे अनुमान होता है कि खुशहालसिंह और वदनसिंह ने मालवे में लूट-मार आरंभ की हो। (४) बादशाह फ़र्रुख़सियर के समय के अख़बारात-इ-दरबार-इ-मुअल्ला से।

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