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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

पृष्ठ 257, कुल 534 में से

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पृष्ठ 257

२०६ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास कुंवर पहाड़सिंह के नाम अंकित हैं। इससे पाया जाता है कि उक्त सम्वत् के माघ सुदि १३ तक तो उक्त कुंवर जीवित था। इसके बाद ही उसका उदयपुर में रहते समय देहांत होना संभव है। महारावत के उत्तराधिकारी कुंवर पहाड़सिंह' का उसकी विद्यमानता में वि० सं० १७७५ (ई० स० १७१८) के लगभग देहांत हो गया, जिसका महारावत (१) "वीरविनोद" (द्वितीय भाग, पृ० १०६३) में जहां महारावत पृथ्वीसिंह के पुत्रों के नाम दिये हैं, वहां पहाड़सिंह का नाम प्रथम और फिर उम्मेदसिंह, पद्मसिंह, कल्याणसिंह आदि नाम दिये हैं । इससे पाया जाता है कि पहाड़सिंह, महारावत का ज्येष्ठ पुत्र था, परंतु प्रतापगढ़ राज्य के बड़वे की ख्यात का कथन इसके विपरीत है और उससे पद्मसिंह का पृथ्वीसिंह के पीछे गद्दी बैठने का संदेह हो सकता है, इसलिए "वीरविनोद" के लेखक ने (पृ० १०६३ टिप्पण १ में) इस विषय को स्पष्ट करने के लिए कुछ संकेत किया है। पद्मसिंह के राजगद्दी पर बैठने का अन्य जगह उल्लेख नहीं मिलता। वस्तुतः पृथ्वीसिंह के बाद उसका पौत्र संग्रामसिंह, जिसको रामसिंह भी कहते थे, गद्दी बैठा था। उसके कुछ दानपत्र भी मिले हैं। समय क्रम को देखते हुए पद्मसिंह का गद्दी पर बैठना सिद्ध नहीं होता । बड़वे की ख्यात में कुंवर पद्मसिंह की पत्नी का नाम भी दिया है। उसमें पहाड़सिंह का नाम पृथ्वीसिंह के तीसरे पुत्र के रूप में लिखा है एवं पहाड़सिंह की पत्नी और उसके पुत्र संग्रामसिंह (रामसिंह) का नाम ही नहीं है। प्रतापगढ़ राज्य की एक पुरानी ख्यात (पृ० १०) में पहाड़सिंह को पद्मसिंह का पुत्र बतलाकर संग्रामसिंह (रामसिंह) को पहाड़सिंह का पुत्र लिखा है, पर महारावत पृथ्वीसिंह के समय के वि० सं० १७६६ (ई० स० १७१२) और वि० सं० १७७४ (ई० स० १७१७) के शिलालेखों में पहाड़सिंह का नाम महारावत के नाम के साथ लिखा है, जिससे स्पष्ट है कि पहाड़सिंह, पृथ्वीसिंह का वास्तविक उत्तराधिकारी था, जिससे उसका नाम शिलालेखों में खोदा गया। संभव है वि० सं० १७६६ (ई० स० १७१२) के पूर्व कुंवर पद्मसिंह का देहांत हो गया हो, तब उसके स्थान पर पहाड़सिंह, जिसको बड़वे की ख्यात में पृथ्वीसिंह का तीसरा पुत्र बतलाया है, प्रचलित प्रथा के अनुसार पद्मसिंह की स्त्री के दत्तक बिठालाकर प्रतापगढ़ राज्य का भावी उत्तराधिकारी निर्वाचित किया गया हो। इस अवस्था में, जैसी कि प्रणाली है, वह पद्मसिंह का पुत्र भी लिखा जा सकता है; परन्तु जब तक यथेष्ट प्रमाण न मिले, इस संबंध में निश्चित मत प्रकट नहीं किया जा सकता।