भारतकोश
राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

पृष्ठ 269, कुल 534 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 269

२१६ प्रतापगढ़ राज्य का इतिहास राजगद्दी पर बिठलाया । वह भी अधिक समय तक राज्यसुख का उपभोग न कर सका और वि० सं० १७७८¹ ( ई० स० १७२१ ) में उसकी मृत्यु हो गई । प्रतापगढ़ से प्राप्त शिलालेखों और ताम्रपत्रों की सूची में उस- ( उम्मेदसिंह ) का सबसे पहला लेख वि० सं० १७७६ ज्येष्ठ सुदि ७² ( ई० [महारावत के शिलालेख और दानपत्र] स० १७१६ ता० १५ मई ) और अंतिम लेख वि० सं० १७७७ माघ वदि ३०³ ( ई० स० १७२१ ता० १६ जनवरी ) का दिया है । वि० सं० १७७७ आषाढ सुदि १५⁴ ( ई० स० १७२० ता० ८ जुलाई ) के उसके ताम्रपत्र की छाप तथा उसी वर्ष के मार्गशीर्ष वदि ५⁵ ( ता० ८ नवम्बर ) बुधवार के ताम्रपत्र की प्रतिलिपि हमारे पास आई हैं, जिनसे उसका समय निश्चित करने के अतिरिक्त और कोई वृत्तांत ज्ञात नहीं होता । ( १ ) महारावत गोपालसिंह के सबसे पहले वि० सं० १७७८ वैशाख सुदि १ ( ई० स० १७२१ ता० १६ अप्रेल ) के दानपत्र का प्रतापगढ़ राज्य से प्राप्त शिलालेखों की सूची में उल्लेख है, जिससे स्पष्ट है कि वि० सं० १७७८ ( ई० स० १७२१ ) के प्रारंभ में गोपालसिंह प्रतापगढ़ राज्य का स्वामी हो चुका था । इसकी पुष्टि उक्त महारावत के वि० सं० १७७८ श्रावण सुदि १३ ( ई० स० १७२१ ता० २६ जुलाई ) बुधवार के सेखड़ी गांव के गोसाईं गंगागिरि के नाम के दानपत्र से भी होती है, जिसमें उसके उदयपुर जाने और वहां यह दानपत्र लिखाने का उल्लेख है । ( २ ) देखो ऊपर पृ० २१४, टि० २ । ( ३ ) प्रतापगढ़ राज्य से प्राप्त शिलालेखों की सूची से । ( ४ ) जोशी रोड़ा सुखराम के नाम बसाइ में ३५ बीघा ज़मीन देने के संबंध के ताम्रपत्र की मूल छाप से । ( ५ ) भाट फत्ता के नाम के महारावत उम्मेदसिंह के ताम्रपत्र की प्रतिलिपि से । तिथि और वार का मिलान करने पर उस दिन ( मार्गशीर्ष वदि ५ को ) बुधवार के स्थान में मंगलवार आता है ।

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ) · पृष्ठ 269, कुल 534 में से · BharatKosha