राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)
History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha
महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहारावत उम्मेदसिंह २१७
वि० सं० १७७६ ज्येष्ठ सुदि ७ के ताम्रपत्र के संबंध में हम ऊपर अपना मत प्रकट कर चुके हैं¹। महारावत उम्मेदसिंह दानी राजा था। उसने अपने अल्प शासन- काल में कई व्यक्तियों को गांव और भूमि दी एवं भाट फत्ता [पार्श्व टिप्पणी: महारावत की रानियां और संतति] को कुंवरपदे की सेवा में वेलाली गांव, जो पहले मेहडु रणछोड़ चारण का था, देकर उसके एवज़ में रणछोड़ को संचई गांव दिया था। उक्त महारावत ने पुष्कर-यात्रा के अवसर पर भूमिदान भी किया था। प्रतापगढ़ राज्य के बड़वे की ख्यात में उसके चार रानियां और एक कुंवरी अमृतकुंवरी होने का उल्लेख है²।
( १ ) देखो ऊपर पृ० २१४, टि० २ । ( २ ) पृ० ७ । "जोधपुर राज्य की ख्यात" (द्वितीय भाग, पृ० ११६) में लिखा है कि सीसोदिया उम्मेदसिंह जगतसिंहोत की राठोड़ पत्नी देवलिया छूट जाने पर जोधपुर चली गई । उसके दो पुत्र सालिमसिंह और खुमाणसिंह थे । महाराजा अजीतसिंह उस( उम्मेदसिंह की पत्नी )का सहोदर भगिनी के समान आदर करता था । जब वि० सं० १७८१ आषाढ सुदि १३ ( ई० स० १७२४ ता० २३ जून ) को महाराजा अजीतसिंह अपने पुत्र वख्तसिंह-द्वारा मार डाला गया, तब उसके साथ उसकी जिन रानियों, सेवकों आदि ने अग्नि में जलकर प्राण विसर्जन किये उनमें उम्मेदसिंह की पत्नी भी थी । उक्त ख्यात का यह कथन कहां तक ठीक है, इसके विषय में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि प्रतापगढ़ राज्य की ख्यातों से इसका समर्थन नहीं होता है । "जोधपुर राज्य की ख्यात" का यह कथन कि उम्मेदसिंह जगतसिंह का पुत्र था, निर्मूल है; कारण वहां जगतसिंह नाम का कोई राजा ही नहीं हुआ। प्रतापगढ़ राज्य के बड़वे की ख्यात से पाया जाता हैं कि वहां के महारावत उम्मेदसिंह के राठोड़ कुल की तीन रानियां थीं । संभव है कि उसकी इन रानियों में से कोई जोधपुर जाकर भी रही हो। वहां ऐसी भी प्रसिद्धि है कि महारावत उम्मेदसिंह की मृत्यु के समय उसकी एक राणी केसरकुंवरी ( कछवाहा राजावत कुशलसिंह की पुत्री ) अपने बालक-पुत्र सालिमसिंह को प्राणभय से कुछ लोगों के बहकाने पर जयपुर की तरफ लेकर चली गई । इसपर कल्याणपुरा के सरदार फ़तहसिंह की सम्मति से, उम्मेदसिंह का छोटा भाई गोपालसिंह देवलिया राज्य का स्वामी हो गया । इससे तो यही निष्कर्ष निकलता २८