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राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

राजपूताने का इतिहास (मेवाड़ राज्य का इतिहास व वीर गाथाएँ)

History of Rajputana & Mewar by Gaurishankar Ojha

महामहोपाध्याय पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished534 पृष्ठ

पृष्ठ 272, कुल 534 में से

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महारावत गोपालसिंह २१६ उन दिनों मुग़ल बादशाहत की स्थिति बहुत ही गंभीर हो रही थी। फ़र्रुख़सियर के सैयद बंधुओं-द्वारा बंदी बनाकर कठिन यातना देने के मुग़ल वादशाहत की तत्का- उपरांत मरवा डालने से मुग़ल साम्राज्य को बड़ा लीन स्थिति धक्का लगा और चारों तरफ़ अराजकता फैल गई। सैयदों ने औरंगज़ेब के वंशधरों में से ही रफ़ीउद्दरजात¹ और रफ़ीउद्दौला² को क्रमशः दिल्ली के तख़्त पर बैठाया, किन्तु सात महीनों में ही वे दोनों व्याधिग्रस्त होकर काल-कवलित हो गये। रफ़ीउद्दौला के समय कतिपय व्यक्तियों ने औरंगज़ेब के शाहज़ादे अकबर के पुत्र निकोसियर को आगरे में बादशाह बनाया, जहां वह क़ैद था, परंतु इसमें उनको सफलता न हुई और सैयद बंधुओं ने वहां पहुंच निकोसियर को पुनः क़ैद कर लिया तथा उसके सहायकों को दंड देकर अपना मार्ग निष्कंटक कर लिया। फिर उन्होंने रफ़ीउद्दौला के निःसंतान मर जाने पर बहादुरशाह के शाहज़ादे जहांशाह के पुत्र रोशनअख़्तर को वि० सं० १७७६ (ई० स० १७१६) में मुहम्मदशाह नाम रख बादशाह बनाया, परंतु सुव्यवस्था स्थापित न हो सकी। यह अवसर मरहटों को अपनी शक्ति बढ़ाने में बड़ा लाभदायक सिद्ध हुआ और उनके उत्तरी भारत में आक्रमण होने लगे। (१) रफ़ीउद्दरजात, बादशाह बहादुरशाह के तीसरे शाहज़ादे रफ़ीउश्शान का पुत्र था। बादशाह फ़र्रुख़सियर को बंदी बनाने के पीछे सैयद बंधुओं ने हि० स० ११३१ ता० ६ रबीउस्सानी (वि० सं० १७७५ फाल्गुन सुदि १० = ई० स० १७१६ ता० १८ फ़रवरी) को उसको दिल्ली के तख़्त पर बिठाकर उसका नाम "शम्सुद्दीन अबुलबरक़त रफ़ीउद्दरजात" रखा। तख़्तनशीनी के समय वह रोगग्रस्त था, जिससे तीन मास बाद ही उसकी मृत्यु हुई। (२) रफ़ीउद्दौला, रफ़ीउद्दरजात का बड़ा भाई था। ता० २० रजब हि० ११३१ (वि० सं० १७७६ आषाढ वदि ६ = ई० स० १७१६ ता० २६ मई) को वह "शम्सुद्दीन रफ़ीउद्दौला मुहम्मद शाहजहांसानी" नाम से दिल्ली का स्वामी हुआ और उसी वर्ष ता० ७ ज़िल्काद (प्रथम आश्विन सुदि ६=ता० ११ सितंबर) को उसका देहांत हुआ।